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सचिन वाझे को बॉम्बे हाई कोर्ट से झटका


सचिन वाझे को बॉम्बे हाई कोर्ट से झटका, विशेष अदालत की जमानत रद्द, जेल में ही रहेंगे

मुंबई, 05 नवंबर (हि.स.)। बर्खास्त पुलिस अधिकारी सचिन वाझे को बॉम्बे उच्च न्यायालय से बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने गुरुवार को विशेष सत्र न्यायालय द्वारा वाझे को दी गई जमानत रद्द कर दी। इस फैसले के बाद पिछले पांच वर्षों से जेल में बंद वाझे को फिलहाल जेल में ही रहना होगा।

उद्योगपति मुकेश अंबानी के दक्षिण मुंबई स्थित आवास 'एंटीलिया' के बाहर विस्फोटक सामग्री से भरी कार मिलने और इसके बाद कारोबारी मनसुख हिरेन की हत्या के मामले में सचिन वाझे पांच साल से अधिक समय से जेल में बंद है। पिछले महीने विशेष सत्र न्यायालय ने उसे जमानत दे दी थी। हालांकि, राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने इस फैसले को चुनौती देते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया था। एनआईए ने याचिका पर तत्काल सुनवाई कर विशेष अदालत द्वारा दी गई जमानत रद्द करने की मांग की थी।

न्यायमूर्ति गिरीश कुलकर्णी और न्यायमूर्ति नीला गोखले की खंडपीठ ने एनआईए की याचिका पर विस्तृत सुनवाई की थी। इस दौरान हाईकोर्ट ने विशेष सत्र न्यायालय के जमानत आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी थी। इसके बाद 16 अक्टूबर को अदालत ने याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। गुरुवार को खंडपीठ ने फैसला सुनाते हुए विशेष अदालत द्वारा सचिन वाझे को दी गई जमानत रद्द कर दी।

एनआईए ने बताया था साजिश का मुख्य उद्देश्य

सुनवाई के दौरान एनआईए की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अनिल सिंह ने दलील दी थी कि सचिन वाझे का कथित तौर पर फर्जी मुठभेड़ मामले में शामिल होने के कारण पहले निलंबन हुआ था। बाद में उसे दोबारा सेवा में बहाल कर मुंबई पुलिस की अपराध शाखा के अपराध खुफिया विभाग का प्रमुख बनाया गया था।

एनआईए के अनुसार, वाझे अपनी छवि सुधारना चाहता था। इसी उद्देश्य से उसने एक बड़े उद्योगपति के आवास के बाहर विस्फोटक सामग्री से भरी कार खड़ी करने की साजिश रची, ताकि इस मामले की जांच उसे ही सौंपी जाए। इसके बाद वह खुद इस मामले को सुलझाने का दावा कर 'सुपर कॉप' के रूप में वाहवाही हासिल करना चाहता था।

अनिल सिंह ने अदालत में दलील दी थी कि इस साजिश का उद्देश्य केवल मुकेश अंबानी और उनके परिवार में ही नहीं, बल्कि पूरे समाज में भय का माहौल पैदा करना था। एनआईए काl दावा था कि विस्फोटक सामग्री से भरी कार मनसुख हिरेन की थी। साजिश का खुलासा होने के डर से वाझे ने कथित तौर पर हिरेन की हत्या करवा दी।

वाझे के वकील ने जमानत के पक्ष में दी थीं दलीलें

वहीं, सचिन वाझे की ओर से अधिवक्ता वी. एम. थोरात ने जमानत के पक्ष में दलीलें पेश की थीं। उन्होंने कहा था कि बिना फ्यूज वाली जिलेटिन की छड़ें जब्त होने मात्र से गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत आतंकवादी कृत्य साबित नहीं होता। इस संबंध में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का भी हवाला दिया था।

थोरात ने अदालत को बताया था कि वाझे को मार्च 2021 में गिरफ्तार किया गया था और इस घटना को लगभग पांच वर्ष बीत चुके हैं। इसके बावजूद जांच अभी तक पूरी नहीं हुई है। मामले में करीब 320 गवाहों की गवाही होना बाकी है और अब तक मुकदमे की सुनवाई भी शुरू नहीं हो सकी है।इसके अलावा, वाझे के खिलाफ यूएपीए के तहत लगाए गए आरोप भी रद्द किए जा चुके हैं।

उन्होंने यह भी दलील दी थी कि इस मामले के सह-आरोपी और पूर्व पुलिस अधिकारी प्रदीप शर्मा को हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट से उन्हें राहत मिली है। अन्य आरोपियों को भी जमानत मिल चुकी है।

वाझे के वकील ने समानता के सिद्धांत का हवाला देते हुए कहा था कि यूएपीए जैसे कठोर कानूनों के मामलों में भी जमानत पर विचार करते समय लंबे समय तक जेल में रहने और मुकदमे में हो रही देरी को ध्यान में रखना आवश्यक है। इन्हीं आधारों पर उन्होंने सचिन वाझे को भी जमानत दिए जाने की मांग की थी।

हालांकि, बॉम्बे हाई कोर्ट ने एनआईए की याचिका स्वीकार करते हुए विशेष सत्र न्यायालय का जमानत आदेश रद्द कर दिया। इससे सचिन वाझे को फिलहाल जेल में ही रहना होगा।-------------------------------

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