रामलीला मैदान की रैली पर भाजपा का हमला, प्रेम शुक्ला बोले- देश में अराजकता फैलाने का षड्यंत्र कर रहे राहुल गांधी
भोपाल, 05 नवंबर (हि.स.)। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष एवं विधायक हेमंत खण्डेलवाल और पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रेम शुक्ला ने गुरुवार को भाजपा प्रदेश कार्यालय में पत्रकार-वार्ता कर कांग्रेस नेता राहुल गांधी और विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोला। प्रेम शुक्ला ने आरोप लगाया कि रामलीला मैदान में राहुल लीला करने वाले लोग देश में अराजकता फैलाने का षड्यंत्र कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अपनी चुनावी विफलताओं को छिपाने के लिए निर्वाचन आयोग और संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बना रही है।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खण्डेलवाल ने कहा कि राहुल गांधी के नेतृत्व में देशभर में अराजकता फैलाने का प्रयास किया जा रहा है। विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) कोई नई प्रक्रिया नहीं है। आजादी के बाद अब तक 12 बार यह प्रक्रिया अपनाई जा चुकी है, जिनमें 10 बार कांग्रेस शासनकाल में हुई। भाजपा शासनकाल में दो बार एसआईआर हुआ। इसके बावजूद राहुल गांधी मतदाता सूची से 13 करोड़ लोगों के नाम काटे जाने का भ्रामक आंकड़ा पेश कर जनता को गुमराह कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष विदेशी नागरिकों और घुसपैठियों को मतदाता सूची में बनाए रखने के लिए विवाद खड़ा कर रहा है।
खण्डेलवाल ने कहा कि मतदाता सूची का शुद्धिकरण लोकतंत्र की मजबूती के लिए जरूरी है। मृत व्यक्तियों के नाम हटाना, एक से अधिक स्थानों पर दर्ज नामों का दोहराव समाप्त करना और स्थायी रूप से स्थानांतरित मतदाताओं का सत्यापन करना निर्वाचन आयोग की जिम्मेदारी है। पात्र नागरिकों के नाम सुरक्षित रखते हुए अपात्र और डुप्लीकेट नाम हटाना आवश्यक है। एसआईआर के दौरान बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) के साथ भाजपा, कांग्रेस सहित सभी राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंट (बीएलए) भी शामिल रहते हैं। प्रत्येक व्यक्ति को मतदाता सूची के संबंध में आपत्ति दर्ज कराने का अधिकार है।
उन्होंने निर्वाचन प्रक्रिया में कर्मचारियों की मेहनत का उल्लेख करते हुए कहा कि गुजरात में एक मतदाता के सत्यापन के लिए 10 कर्मचारियों को मेहनत करनी पड़ी, जबकि अरुणाचल प्रदेश में पांच मतदाताओं के पंजीयन के लिए कर्मचारियों को करीब 20 किलोमीटर दुर्गम रास्ते पर चढ़ाई करनी पड़ी। उन्होंने कहा कि भोपाल की पदयात्रा में डॉक्टरों, वकीलों, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों और अल्पसंख्यक समाज की महिलाओं सहित विभिन्न वर्गों के लोगों ने भाग लिया। भाजपा ने विपक्ष की राजनीति के विरोध में ‘लोकतंत्र बचाओ-अराजकता हटाओ’ अभियान शुरू किया है। इंदौर, जबलपुर और भोपाल में पदयात्राएं निकाली जा चुकी हैं। अब इसे प्रदेश के प्रत्येक जिले तक पहुंचाया जाएगा।
सड़क पर बहस की चुनौती देने का नैतिक अधिकार नहीं
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रेम शुक्ला ने कहा कि सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच विमर्श के लिए संविधान में संसद का सदन निर्धारित है। राहुल गांधी सदन में बहस करने के बजाय हंगामा करते हैं और सदन छोड़कर चले जाते हैं। इसके बाद सड़क पर बहस की चुनौती देते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि चार बार ऐसा हुआ, जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार सदन में अपना पक्ष रखने लगी तो राहुल गांधी और कांग्रेस के नेता सदन छोड़कर चले गए। ऐसे में राहुल गांधी को सड़क पर बहस की चुनौती देने का नैतिक अधिकार नहीं है।
शुक्ला ने कहा कि कांग्रेस और राहुल गांधी की राजनीति झूठ, भ्रम और अराजकता फैलाने तक सीमित रह गई है। लगातार चुनावी हार का आत्ममंथन करने के बजाय कांग्रेस अपनी विफलताओं का ठीकरा निर्वाचन आयोग और संवैधानिक संस्थाओं पर फोड़ रही है। बिहार सहित विभिन्न राज्यों में वोट चोरी के आरोप लगाकर यात्राएं और राजनीतिक अभियान चलाए गए, लेकिन आरोपों के समर्थन में ठोस प्रमाण सामने नहीं रखे गए। बिहार में एसआईआर को लेकर सर्वोच्च न्यायालय में 18 याचिकाएं दायर की गईं, लेकिन कांग्रेस और विपक्षी दल अपने आरोप प्रमाणित नहीं कर सके। उन्होंने सवाल किया कि यदि वास्तव में वोट चोरी हुई है तो राहुल गांधी ऐसे किसी वैध मतदाता का प्रमाण क्यों नहीं देते, जिसका नाम गलत तरीके से सूची से हटाया गया हो?
प्रेम शुक्ला ने कांग्रेस और भाजपा के विधायकों की संख्या का तुलनात्मक विवरण देते हुए कहा कि वर्ष 2008 में राहुल गांधी को कांग्रेस महासचिव बनाए जाने के समय देश में कांग्रेस के 1,182 और भाजपा के 889 विधायक थे। वर्ष 2014 में राहुल गांधी के कांग्रेस उपाध्यक्ष बनने के समय कांग्रेस के विधायकों की संख्या घटकर 883 रह गई, जबकि भाजपा के विधायक बढ़कर 1,035 हो गए। वर्ष 2017 में राहुल गांधी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के समय कांग्रेस के 807 और भाजपा के 1,365 विधायक थे। वर्ष 2024 में राहुल गांधी के लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष बनने के समय कांग्रेस के विधायकों की संख्या 654 रह गई, जबकि भाजपा के विधायक 1,588 हो गए।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में कांग्रेस के 663 विधायकों के मुकाबले भाजपा के 1,819 विधायक हैं। राहुल गांधी को जब-जब कांग्रेस में बड़ी जिम्मेदारी मिली, पार्टी का राजनीतिक ग्राफ नीचे गिरता गया। कांग्रेस का जनाधार क्यों सिमट रहा है, इसका जवाब राहुल गांधी को देना चाहिए। लेकिन पार्टी में नेतृत्व पर सवाल उठाने का साहस किसी नेता में नहीं है। इसलिए अपनी राजनीतिक विफलता छिपाने के लिए वोट चोरी और एसआईआर को मुद्दा बनाया जा रहा है।
शुक्ला ने एसआईआर के इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि देश में पहली बार 1952 से 1956 के बीच तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के कार्यकाल में यह प्रक्रिया अपनाई गई थी। इसके बाद 1957, 1961, 1965, 1966, 1983-84, 1987-89, 1992-93, 1995 और 2002-03 में भी विशेष गहन पुनरीक्षण हुआ। वर्ष 2002-03 में यह प्रक्रिया तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में हुई थी। इसके बाद 2025 में फिर एसआईआर शुरू हुआ। उन्होंने कहा कि 12 में से 10 बार यह प्रक्रिया कांग्रेस शासनकाल में हुई है। यदि कांग्रेस एसआईआर को असंवैधानिक मानती है तो उसे बताना चाहिए कि नेहरू, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी और डॉ. मनमोहन सिंह के कार्यकाल में यह प्रक्रिया कैसे उचित थी?
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने कहा कि मतदाता सूची से 13 करोड़ नाम हटाए जाने का आरोप भ्रामक है। उनके अनुसार, करीब 6.3 करोड़ मतदाता स्थायी रूप से दूसरे स्थानों पर चले गए थे। लगभग तीन करोड़ मतदाता तीन बार नोटिस दिए जाने के बावजूद अपने पते पर नहीं मिले। करीब 2.5 करोड़ मृत मतदाताओं के नाम सूची में दर्ज थे, जबकि लगभग एक करोड़ डुप्लीकेट नाम थे। इनका सत्यापन कर मतदाता सूची को शुद्ध करने की कार्रवाई की गई है।
उन्होंने कहा कि पिछले 22 वर्षों में देश में बड़े पैमाने पर आंतरिक स्थायी प्रवास हुआ है। ऐसे में मतदाता सूची को अद्यतन करना जरूरी है। उत्तरप्रदेश, महाराष्ट्र, आंध्रप्रदेश, कर्नाटक, तेलंगाना, झारखंड, तमिलनाडु, गुजरात, राजस्थान और मध्यप्रदेश सहित विभिन्न राज्यों में डुप्लीकेट और मृत मतदाताओं के नामों का सत्यापन किया गया है। मध्यप्रदेश में लगभग 2.7 लाख डुप्लीकेट और 8.46 लाख मृत मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं।
प्रेम शुक्ला ने दिल्ली के रामलीला मैदान में कांग्रेस की रैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि पार्टी ने 10 लाख लोगों के जुटने का दावा किया था, जबकि वास्तव में करीब 25 हजार लोग ही पहुंचे। उन्होंने आरोप लगाया कि रैली के लिए दीपावली से ठीक पहले दिल्ली के पुराने बाजारों के लगभग तीन लाख व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को बंद करना पड़ा, जिससे व्यापारियों को आर्थिक नुकसान हुआ। व्यापारिक संगठनों ने प्रदर्शन की तारीख बदलने की अपील भी की थी, लेकिन कांग्रेस ने उनकी बात नहीं मानी। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस लगातार संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठाकर देश में अविश्वास और अराजकता का माहौल बनाने का प्रयास कर रही है।