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वालमार्ट-फ्लिपकार्ट डील को कानूनी चुनौती देगा कैट

 

मुंबई, 10 अगस्त (हि.स.)। वालमार्ट फ्लिपकार्ट डील का पेंच फंसता नजर आ रहा है। कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने इस डील के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ने का एेलान किया है। कैट ने अपनी राष्ट्रिय गवर्निंग कॉउन्सिल की एक आपात बैठक आगामी 19 अगस्त को नागपुर में बुलाई है। कैट की ओर से आंदोलन छेड़ने की धमकी दी गई है। 
कैट की ओर से जारी बयान के मुताबिक भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग ने वालमार्ट फ्लिपकार्ट डील को मंजूरी दी है। यह फैसला एकपक्षीय है क्योंकि आयोग ने कैट और अन्य संगठनों की ओर से उठाई गई आपत्तियों को दरकिनार किया है। संगठनों का पक्ष सुनने का भी कोई मौका नहीं दिया गया। आयोग ने न्याय के प्राकृतिक सिद्धांत की अवहेलना की है। आयोग के निर्णय के खिलाफ कैट ने न्यायलय जाने का निर्णय लिया है। इस मामले में एक देशव्यापी आंदोलन भी छेड़ा जाएगा। कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बी.सी.भरतिया और राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल के अनुसार आयोग के निर्णय को लेकर कैट केंद्र सरकार के दरवाजे भी खटखटाएगा। सरकार इस मामले में मूक दर्शक बन कर नहीं रह सकती है। जहां आयोग यह मानता है कि ई कॉमर्स बाजार में लागत से भी कम मूल्य पर माल बेचा जा रहा है और डिस्काउंट दिए जा रहे हैं। निश्चित रूप से इसका प्रभाव कीमतों पर पड़ता है और प्रतिस्पर्धा प्रभावित होती है। आयोग का कहना है यह मामला उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता जो कि बेहद हास्यास्पद है। स्पष्ट है कि आयोग ने अपने अधिकार क्षेत्र में होते हुए भी जान-बूझकर इस महतवपूर्ण विषय की अनदेखी की है। वालमार्ट फ्लिपकार्ट डील को दी गई मंजूरी न्याय के खिलाफ है। लग रहा है आयोग किसी दबाव में काम कर रहा है। 
भरतिया और खंडेलवाल के अनुसार आयोग का मानना है कि फ्लिपकार्ट पर बेहद कम विक्रेता ही सबसे ज्यादा सामान बेच रहे हैं। जो यह दर्शाता है कि इसके पीछे फ्लिपकार्ट की भूमिका है और कुछ खास विक्रेताओं द्वारा ही माल बेचा जाता है। जो पोर्टल पर पंजीकृत अन्य विक्रेताओं के साथ एक बड़ा भेदभाव है। भारत सरकार के वर्ष 2016 के प्रेस नोट 3 में साफ लिखा है कि ई कॉमर्स पोर्टल केवल मार्किट प्लेस का काम करेगा। किसी भी सूरत में कीमतों को प्रभावित नहीं करेगा। सामान बेचने का अवसर प्रदान करना उसकी जिम्मेदारी होगी। फ्लिपकार्ट ठीक इसके उलट काम कर रहा है। प्रेस नोट 3 में यह भी स्पष्ट किया गया है कि ई कॉमर्स में एफडीआई को अनुमति नहीं होगी लेकिन वालमार्ट फ्लिपकार्ट को जो पैसा दे रहा है वो विदेशी निवेश ही है।