कोलकाता, 24 फरवरी (हि. स.)। पश्चिम बंगाल के प्राथमिक शिक्षक भर्ती घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बिभास अधिकारी को पूछताछ के लिए तलब किया है। एजेंसी सूत्रों ने मंगलवार को यह जानकारी दी।
बिभास अधिकारी को तृणमूल कांग्रेस विधायक माणिक भट्टाचार्य का करीबी सहयोगी माना जाता है। माणिक भट्टाचार्य को प्राथमिक शिक्षक भर्ती घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय ने गिरफ्तार किया था। वर्ष 2024 में कलकत्ता हाई कोर्ट से उन्हें जमानत मिली थी और फिलहाल वह जमानत पर बाहर हैं।
उल्लेखनीय है कि इस मामले की जांच प्रवर्तन निदेशालय के साथ-साथ सीबीआई भी कर रहा है। इससे पहले दोनों एजेंसियों ने बिभास अधिकारी के कई ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया था, जिनमें बीरभूम जिले के नलहाटी स्थित पते भी शामिल हैं। जांच एजेंसी ने उन्हें कई बार पूछताछ के लिए भी बुलाया था।
सूत्रों के अनुसार, अदालत में भर्ती घोटाले से संबंधित आरोपपत्र भी दायर किया जा चुका है, जिसमें बिभास अधिकारी का नाम शामिल है। इस बार प्रवर्तन निदेशालय ने उन्हें वित्तीय लेनदेन और कथित अनियमितताओं के संबंध में पूछताछ के लिए तलब किया है।
बिभास अधिकारी नलहाटी क्षेत्र में तृणमूल कांग्रेस के पूर्व प्रखंड अध्यक्ष रह चुके हैं। वह एक निजी बीएड और डीएलएड महाविद्यालय संगठन के पूर्व अध्यक्ष भी बताए जाते हैं। वर्ष 2022 में मणिक भट्टाचार्य की गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसियों ने उत्तर कोलकाता के एमहर्स्ट स्ट्रीट स्थित एक फ्लैट पर छापा मारा था, जिसके साथ बिभास अधिकारी के कथित संबंध की बात कही गई थी। तलाशी के बाद उस फ्लैट को सील कर दिया गया था।
अप्रैल 2023 में केंद्रीय जांच एजेंसी ने बीरभूम में बिभास के घर और आश्रम पर भी छापेमारी की थी, जहां से बड़ी संख्या में दस्तावेज जब्त किए गए थे। इसके बाद उन्हें कोलकाता स्थित निजाम पैलेस कार्यालय में कई बार पूछताछ के लिए बुलाया गया।
भर्ती घोटाले में गिरफ्तार तृणमूल के पूर्व युवा नेता कुंतल घोष ने भी सार्वजनिक रूप से सवाल उठाया था कि बिभास अधिकारी की गिरफ्तारी क्यों नहीं हो रही है। इसी प्रकार मामले से जुड़े एक अन्य आरोपित गोपाल दलपति ने भी उनके खिलाफ बयान दिया था। इसके बाद केंद्रीय जांच एजेंसी ने नलहाटी स्थित उनके आवास और आश्रम पर दोबारा तलाशी अभियान चलाया।
अक्टूबर 2025 में केंद्रीय जांच एजेंसी ने प्राथमिक भर्ती घोटाले में अंतिम आरोपपत्र दाखिल किया था। इसमें माणिक भट्टाचार्य, बिभास अधिकारी और रत्ना बागची सहित अन्य आरोपितों के नाम शामिल किए गए। जांच में दावा किया गया कि प्राथमिक भर्ती प्रक्रिया में लगभग 350 लोगों को कथित तौर पर अनियमित तरीके से नियुक्ति दी गई।
जांचकर्ताओं को संदेह है कि इस पूरे प्रकरण में बिभास अधिकारी कथित रूप से बिचौलिये की भूमिका निभा रहे थे।