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जींद में नागरिक एकता मंच ने निकाला सद्भावना मार्च

सोमवार को नेहरू पार्क से नागरिक एकता मंच जींद के आह्वान पर सद्भावना मार्च निकाला गया। मार्च गांधी गली, मेन बाजार व पुरानी अनाज मंडी से होते हुए डा. भीमराव अंबेडकर चौक रानी तालाब तक शांति एवं सद्भावना मार्च निकाला गया। जिसमें जिला के प्रबुद्ध नागरिकों, जनसंगठनों, विभिन्न धर्मों, जातियों व विपक्षी पार्टियों, विभिन्न जन संगठनों, प्रगतिशील, बुद्धिजीवियों आदि कार्यकर्ताओं एवं नेताओं ने भाग लिया।

मार्च से पहले सभी गणमान्य लोग नेहरू पार्क में इक्कठे हुए और यहां पर बैठक की जिसकी अध्यक्षता जींद के पूर्व कर्मचारी नेता राजबीर बेरवाल ने की व संचालन राजकुमार कटारिया ने किया। शांति मार्च में शामिल लोगों ने हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई आपस में सब भाई-भाई, सद्भावना की सजे रंगोली, मिलकर मनाए ईद और होली, हत्या के आरोपित मोनू मानेसर और बिट्टू बजरंगी को गिरफ्तार करो, जनता का भाईचारा जिंदाबाद आदि नारे लगाए गए और शहर की जनता से आपस मे अमन, चैन व भाईचारा बनाए रखने की अपील की।

सद्भावना मार्च में शामिल लोगों को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने बताया कि भाजपा और आरएसएस लंबे समय से अपने सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की राजनीति को आगे बढ़ाने के लिए मेवात को एक प्रयोगशाला के रूप में देखती आई है। मेवात के लोगों ने आजादी के आंदोलन में और उससे पहले 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में बड़ी शहादते दी हैं। हिंदू व मुस्लिम यहां प्रेम एवं सौहार्द से रहते आए हैं।

आजादी के बंटवारे के समय और 1992 में जब बाबरी मस्जिद ढहाई गई तब भी यहां कोई दंगा नहीं हुआ लेकिन बेहद साजिशाना ढंग से जब से प्रदेश में भाजपा की मनोहर सरकार सत्ता में आई है तब से मेवात को विशेष रूप से टारगेट किया जा रहा है। इसके लिए बजरंग दल, विश्व हिंदू परिषद जैसे सांप्रदायिक संगठनों पर लगातार उकसावेपूर्ण व हमलावर कार्रवाईयों के निरंतर आरोप लगे हैं। जुनैद और नासिर को जिंदा जलाकर मारने के प्रमुख आरोपित मोनू मानेसर ने खुद वीडियो जारी करके अपनी टीम के साथ भाग लेने की घोषणा के साथ बड़ी संख्या में सांप्रदायिक लामबंदी का आह्वान किया था।

इस मौके पर सामाजिक संगठनों के अलावा संजीव ढांडा, कपूर सिंह, रमेश चंद्र, रघुवीर भारद्वाज, प्रदीप गिल, डा. रजनीश जैन, मनोज श्योकंद, प्रकाश चंद्र, रामफल दहिया, पे्रम सिंह सुधीर शास्त्री सहित अनेक गणमान्य लोग मौजूद रहे।

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