कार्यकर्ताओं को हार का दोष देने के बजाय आत्ममंथन करे कांग्रेस: पंकज चौधरी
लखनऊ, 05 नवंबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष एवं केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस में अब हार का ठीकरा कभी ईवीएम, कभी मतदाता सूची, कभी चुनाव आयोग तो कभी अपने ही कार्यकर्ताओं पर फोड़ा जा रहा है। कांग्रेस नेतृत्व अपनी विफलताओं की जिम्मेदारी लेने के बजाय दूसरों में दोष तलाश रहा है। सच्चाई यह है कि जब नेतृत्व में ही दोष हो तो संगठन का मनोबल टूटता है और कार्यकर्ताओं का भरोसा कमजोर पड़ता है।
भाजपा मुख्यालय लखनऊ से जारी एक बयान में उन्होंने कहा कि दिल्ली के रामलीला मैदान में राहुल गांधी की रैली में खाली नजर आती कुर्सियां कांग्रेस के नेतृत्व संकट और कार्यकर्ताओं में घटते उत्साह की तस्वीर बयां करती हैं साथ ही 100 से अधिक युवा कांग्रेस पदाधिकारियों के निलंबन की खबरें इस बात का संकेत हैं कि पार्टी में असंतोष और अविश्वास की स्थिति कितनी गहरी है। अपनी राजनीतिक नाकामी स्वीकार करने के बजाय कांग्रेस अपने ही कार्यकर्ताओं को निशाना बना रही है।
चौधरी ने कहा कि भाजपा और कांग्रेस के बीच यही बुनियादी अंतर है। कांग्रेस में नेतृत्व की विफलता का बोझ कार्यकर्ताओं पर डाला जाता है, जबकि भाजपा में नेतृत्व के प्रति विश्वास, विचारधारा के प्रति प्रतिबद्धता और कार्यकर्ताओं के प्रति सम्मान संगठन की सबसे बड़ी ताकत है। यही कारण है कि भाजपा की रैलियों में कार्यकर्ताओं और जनता का उत्साह लगातार दिखाई देता है।
उन्होंने कहा कि 31 अक्टूबर को मुंबई के बोरीवली में केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल, 2 नवंबर को हैदराबाद में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और कोलकाता में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, 3 नवंबर को लखनऊ में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान तथा 4 नवंबर को गोरखपुर में नितिन नवीन के कार्यक्रमों में उमड़ी भारी भीड़ और जनता की उत्साहपूर्ण भागीदारी भाजपा के मजबूत संगठन, नेतृत्व के प्रति विश्वास और कार्यकर्ताओं के समर्पण को दर्शाती है।
चौधरी ने कहा कि भाजपा में कार्यकर्ता संगठन की असली शक्ति और विचारधारा के वाहक हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और पार्टी की विचारधारा पर कार्यकर्ताओं का अटूट विश्वास ही भाजपा को विश्व का सबसे बड़ा राजनीतिक दल बनाने की ताकत देता है। कांग्रेस को दूसरों में दोष तलाशने के बजाय अपने नेतृत्व और संगठन की कमजोरियों पर आत्ममंथन करना चाहिए।