जयपुर, 29 जून (हि.स.)। राजधानी जयपुर में राजस्थान स्वास्थ्य आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय (आरयूएचएस) की पैरामेडिकल डिप्लोमा परीक्षा में सामूहिक नकल कराने की साजिश का खोराबीसल थाना पुलिस ने पर्दाफाश करते हुए परीक्षा केंद्र संचालक,उसके सहयोगी तथा झुंझुनूं स्थित कॉलेज के दो शिक्षकों सहित चार आरोपिताें को गिरफ्तार किया है। आरोपिताें के कब्जे से अभ्यर्थियों से वसूली गई लाखों रुपये की राशि का रिकॉर्ड, डायरियां, मोबाइल फोन, व्हाट्सएप चैट और प्रवेश पत्रों (एडमिट कार्ड) की पीडीएफ बरामद हुई हैं।
जयपुर पश्चिम के पुलिस उपायुक्त प्रशांत किरण ने बताया कि 27 जून को पुलिस को गोपनीय सूचना मिली थी कि 29 जून से शुरू होने वाली पैरामेडिकल परीक्षा में परीक्षार्थियों से मोटी रकम लेकर सामूहिक नकल कराने की तैयारी की जा रही है। सूचना पर अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त राजेश गुप्ता के निर्देशन तथा सहायक पुलिस आयुक्त शिव कुमार भारद्वाज के सुपरविजन में खोराबीसल थानाधिकारी सुरेन्द्र सिंह के नेतृत्व में विशेष टीम गठित की गई।
पुलिस ने दबिश देकर प्रभा देवी मेमोरियल पीजी कॉलेज के संचालक रामकृष्ण मंडीवाल, उसके सहयोगी देवकृष्ण मंडीवाल, तथा झुंझुनूं के मुकुंदगढ़ स्थित एस. करण कॉलेज के पैरामेडिकल विभागाध्यक्ष कृष्ण कुमार सैनी और लेक्चरर शंकरलाल जाट को गिरफ्तार किया। जांच में सामने आया कि एस. करण कॉलेज के प्रथम वर्ष के कई विद्यार्थियों के पेपर बैक थे। उन्हें पास कराने के लिए जयपुर स्थित परीक्षा केंद्र से सांठगांठ कर लाखों रुपये लेकर सामूहिक नकल की योजना बनाई गई थी। परीक्षा केंद्र पर परिचित वीक्षकों की ड्यूटी लगाकर विद्यार्थियों को अनुचित लाभ पहुंचाने की तैयारी थी।
पुलिस ने जब आरोपिताें के बैग और मोबाइल फोन की तलाशी ली तो उनमें अभ्यर्थियों के नाम, उनसे वसूली गई रकम का पूरा हिसाब-किताब, एडमिट कार्ड की पीडीएफ, परीक्षा केंद्र की लोकेशन तथा संदिग्ध व्हाट्सएप चैट मिली। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि नकल कराने के बदले परीक्षार्थियों से करीब 3.50 लाख रुपये वसूले गए थे। पुलिस को उन विद्यार्थियों के नाम भी कच्ची पर्चियों पर मिले हैं, जिन्हें नकल कराई जानी थी।
पुलिस के अनुसार मुकुंदगढ़ स्थित एस. करण कॉलेज के करीब 40 से 45 विद्यार्थियों को परीक्षा में पास कराने के लिए यह पूरा नेटवर्क तैयार किया गया था। परीक्षा केंद्र पर वीक्षकों की मिलीभगत से सामूहिक नकल कराने की योजना थी, लेकिन पुलिस की समय रहते कार्रवाई से साजिश विफल हो गई।
डीसीपी प्रशांत किरण ने बताया कि आरोपिताें को पुलिस रिमांड पर लेकर पूछताछ की जा रही है। आशंका है कि पूछताछ में अन्य परीक्षाओं में नकल कराने वाले नेटवर्क और अन्य लोगों के नाम भी सामने आ सकते हैं।
परीक्षा तीन दिन तक चलेगी। पूरे मामले की सूचना परीक्षा आयोजित कराने वाली एजेंसी को दे दी गई है। एजेंसी ने सभी परीक्षा केंद्रों पर स्वतंत्र वीक्षकों की नियुक्ति कर दी है। खोराबीसल थाने में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि इस गिरोह का नेटवर्क अन्य परीक्षा केंद्रों तक तो नहीं फैला हुआ था।
डीसीपी प्रशांत किरण ने कहा कि योग्य अभ्यर्थियों के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और मामले में शामिल प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका की गहन जांच की जा रही है।