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भारत की सांस्कृतिक एकात्मता, सामाजिक समरसता में दादागुरु परंपरा का अतुलनीय योगदान: भागवत


जैसलमेर, 6 मार्च (हि.स.)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने शुक्रवार को कहा कि भारत की सांस्कृतिक एकात्मता और सामाजिक समरसता में दादागुरु परंपरा का अतुलनीय योगदान है। उन्होंने कहा कि हमारे पूर्वजों ने सिखाया है कि जीवन में विविधता है लेकिन केवल विविधता को जगह देने से अनेकता पैदा होती है। जैन दर्शन हमें सिखाता है कि श्रद्धा के साथ किसी भी मार्ग पर चलकर ईश्वर को पाया जा सकता है।डॉ. भागवत ने गच्छाधिपति आचार्य जिनमणिप्रभ सुरीश्वर महाराज की निश्रा में दीप प्रज्ज्वलन कर तीन दिवसीय चादर महोत्सव का शुभारंभ किया। इस दौरान पूरा जैसलमेर दादागुरु जिनदत्त सूरि की भक्ति के रंग में डूबा नजर आया। कार्यक्रम का आयोजन यहां के डेडानसर मैदान में किया गया है। संघ प्रमुख भागवत ने समाज से अपील की कि वे सभी हिंदुओं को एक ही परिवार मानें और ऊंच-नीच के भेदभाव को समाप्त कर देश के लिए जीने का संकल्प लें।महोत्सव का सबसे बड़ा आकर्षण 7 मार्च को होने वाला सामूहिक 'दादागुरु इकतीसा' पाठ है। आचार्य श्री जिनमनोज्ञ सागर जी की प्रेरणा से आयोजित इस संकल्प के तहत विश्वभर में एक साथ 1 करोड़ 8 लाख श्रद्धालु पाठ करेंगे।जैसलमेर जैन ट्रस्ट के अध्यक्ष महेंद्र सिंह भंसाली ने बताया कि 11वीं शताब्दी में आचार्य जिनदत्त सूरी के अग्निसंस्कार के समय उनकी चादर का न जलना एक दैवीय चमत्कार माना जाता है। करीब डेढ़ सदी पहले जैसलमेर के महारावल इसे महामारी रोकने के लिए पाटन से लाए थे। अब 871 वर्षों में पहली बार इस पवित्र चादर का सार्वजनिक अभिषेक और दर्शन का अवसर श्रद्धालुओं को मिल रहा है। भंसाली ने बताया कि शनिवार को जैसलमेर किले से भव्य चादर वरघोड़ा (शोभायात्रा) निकलेगा। दोपहर में चादर अभिषेक और शाम को प्रसिद्ध संगीतकारों की सांस्कृतिक प्रस्तुति होगी और रविवार को उपाध्याय महेंद्र सागर महाराज को 'आचार्य पद' प्रदान किया जाएगा। साथ ही अभिषेक जल और वासक्षेप का वितरण होगा। इस कार्यक्रम में महाराष्ट्र सरकार के मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा, पूर्व महारानी रासेश्वरी राज्य लक्ष्मी, पद्मश्री डॉ. डीआर मेहता, संयोजक तेजराज गोलेछा सहित देशभर के 400 संत और हजारों श्रद्धालु उपस्थित रहे।--------------

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