भागलपुर, 18 सितंबर (हि.स.)। उत्तर और दक्षिण बिहार को आपस में जोड़ने वाले सामरिक रूप से महत्वपूर्ण विक्रमशिला सेतु के पुनर्स्थापन की प्रशासनिक व तकनीकी तैयारियां अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं।
गंगा नदी के जलस्तर में लगातार आ रही गिरावट के बीच राज्य सरकार ने इस सेतु को पुराने स्वरूप में लौटाने के लिए युद्धस्तर पर कार्य योजना तैयार की है। हाल ही में केंद्रीय मंत्रियों के साथ भागलपुर के राहत शिविरों का जायजा लेने पहुंचे बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बड़ी घोषणा करते हुए साफ किया कि आगामी एख अक्टूबर से सेतु पर लगे अस्थायी बेली ब्रिज को हटाने और उसके स्थायी सुदृढ़ीकरण का कार्य विधिवत शुरू कर दिया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि मई 2026 में पुल का एक स्लैब क्षतिग्रस्त होकर गंगा नदी में गिर गया था, जिसके बाद बॉर्डर रोड्स ऑर्गेनाइजेशन की मदद से अस्थायी बेली ब्रिज तैयार कर केवल छोटी गाड़ियों के लिए एकतरफा यातायात बहाल किया गया था।
पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत मरम्मत का यह कार्य 30 नवंबर तक पूरा किया जाना था। हालांकि, अगस्त और सितंबर की शुरुआत में गंगा के अप्रत्याशित उफान और बाढ़ की स्थिति के चलते इस शेड्यूल में बदलाव करना पड़ा। अब संशोधित लक्ष्य के अनुसार एक अक्टूबर से बेली ब्रिज को खोलने और हटाने का काम शुरू होगा। वहीं 31 दिसंबर तक क्षतिग्रस्त हिस्से पर स्थायी कंक्रीट स्लैब ढालने का काम हर हाल में पूरा कर लिया जाएगा। जनवरी 2027 में पुल पूरी तरह कंक्रीट स्वरूप में बहाल हो जाएगा और भारी मालवाहक वाहनों समेत सभी गाड़ियों का परिचालन सामान्य रूप से शुरू हो जाएगा।
उल्लेखनीय है कि बिहार राज्य पुल निर्माण निगम इस 126 करोड़ रुपये की मेगा परियोजना को पूरा करने के लिए आईआईटी पटना के विशेषज्ञों के साथ मिलकर काम कर रहा है।
मरम्मत के लिए आवश्यक भारी स्ट्रक्चरल सामग्री और मशीनें पंजाब व हरियाणा से भागलपुर पहुंच चुकी हैं। एक अक्टूबर से मरम्मत कार्य के लिए पुल को पूरी तरह बंद किए जाने के बाद भागलपुर से नवगछिया, कोसी और सीमांचल जाने वाले लाखों यात्रियों के सामने बड़ी चुनौती होगी। चूंकि यह अवधि दुर्गा पूजा, दिवाली और छठ जैसे प्रमुख त्योहारों की होगी, इसलिए जिला प्रशासन ने नदी परिवहन को वैकल्पिक माध्यम के रूप में चुना है। यातायात सुचारू रखने के लिए बरारी पुलघाट से 7 बड़े यात्री जहाजों और मालवाहक जहाजों का परिचालन सुनिश्चित किया जाएगा।
यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इन जहाजों पर लाइफ जैकेट, स्थानीय गोताखोर, एनडीआरएफ और पर्याप्त पुलिस बल तैनात रहेंगे। इसके साथ ही अवैध और ओवरलोड बालू और गिट्टी लदे वाहनों पर कड़ी निगरानी के लिए विशेष प्रवर्तन टीमें घाटों पर तैनात की जाएंगी। वर्तमान दो लेन के विक्रमशिला सेतु पर लगने वाले भीषण महाजाम से स्थायी मुक्ति दिलाने के लिए इसके समानांतर बन रहे फोरलेन महासेतु परियोजना को भी गति दी जा रही है। हालांकि बाढ़ के कारण मुख्य नदी में इसका काम कुछ समय के लिए थमा था, लेकिन अब सहायक बुनियादी ढांचे पर काम तेज है। राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, भागलपुर ने नवगछिया जीरोमाइल से लेकर चौधरीडीह पेट्रोल पंप तक प्रस्तावित फोरलेन पहुंच पथ के चौड़ीकरण के लिए आधिकारिक कसरत तेज कर दी है। इसके लिए जगदीशपुर अंचल के अधिकारियों को सरकारी जमीन की मापी और सीमांकन करने का जिम्मा सौंपा गया है।
इस परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय को मंजूरी के लिए भेजी जा चुकी है। इस पहुंच पथ में रेलवे की लगभग 50 मीटर भूमि भी शामिल है, जिसे पूर्व में बिहार सरकार द्वारा अधिग्रहित किया गया था, उसका भी नए सिरे से भौतिक सत्यापन किया जा रहा है।
अधिकारियों का मानना है कि मुख्य पुल के साथ-साथ इस फोरलेन एप्रोच रोड का निर्माण समय पर पूरा होने से भागलपुर बायपास और पूरे क्षेत्र की कनेक्टिविटी वैश्विक स्तर की हो जाएगी।
एक अक्टूबर से हटेगा बेली ब्रिज, नए साल से सरपट दौड़ेंगी गाड़ियाँ
भागलपुर, 18 सितंबर (हि.स.)। उत्तर और दक्षिण बिहार को आपस में जोड़ने वाले सामरिक रूप से महत्वपूर्ण विक्रमशिला सेतु के पुनर्स्थापन की प्रशासनिक व तकनीकी तैयारियां अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं।
गंगा नदी के जलस्तर में लगातार आ रही गिरावट के बीच राज्य सरकार ने इस सेतु को पुराने स्वरूप में लौटाने के लिए युद्धस्तर पर कार्य योजना तैयार की है। हाल ही में केंद्रीय मंत्रियों के साथ भागलपुर के राहत शिविरों का जायजा लेने पहुंचे बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बड़ी घोषणा करते हुए साफ किया कि आगामी एख अक्टूबर से सेतु पर लगे अस्थायी बेली ब्रिज को हटाने और उसके स्थायी सुदृढ़ीकरण का कार्य विधिवत शुरू कर दिया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि मई 2026 में पुल का एक स्लैब क्षतिग्रस्त होकर गंगा नदी में गिर गया था, जिसके बाद बॉर्डर रोड्स ऑर्गेनाइजेशन की मदद से अस्थायी बेली ब्रिज तैयार कर केवल छोटी गाड़ियों के लिए एकतरफा यातायात बहाल किया गया था।
पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत मरम्मत का यह कार्य 30 नवंबर तक पूरा किया जाना था। हालांकि, अगस्त और सितंबर की शुरुआत में गंगा के अप्रत्याशित उफान और बाढ़ की स्थिति के चलते इस शेड्यूल में बदलाव करना पड़ा। अब संशोधित लक्ष्य के अनुसार एक अक्टूबर से बेली ब्रिज को खोलने और हटाने का काम शुरू होगा। वहीं 31 दिसंबर तक क्षतिग्रस्त हिस्से पर स्थायी कंक्रीट स्लैब ढालने का काम हर हाल में पूरा कर लिया जाएगा। जनवरी 2027 में पुल पूरी तरह कंक्रीट स्वरूप में बहाल हो जाएगा और भारी मालवाहक वाहनों समेत सभी गाड़ियों का परिचालन सामान्य रूप से शुरू हो जाएगा।
उल्लेखनीय है कि बिहार राज्य पुल निर्माण निगम इस 126 करोड़ रुपये की मेगा परियोजना को पूरा करने के लिए आईआईटी पटना के विशेषज्ञों के साथ मिलकर काम कर रहा है।
मरम्मत के लिए आवश्यक भारी स्ट्रक्चरल सामग्री और मशीनें पंजाब व हरियाणा से भागलपुर पहुंच चुकी हैं। एक अक्टूबर से मरम्मत कार्य के लिए पुल को पूरी तरह बंद किए जाने के बाद भागलपुर से नवगछिया, कोसी और सीमांचल जाने वाले लाखों यात्रियों के सामने बड़ी चुनौती होगी। चूंकि यह अवधि दुर्गा पूजा, दिवाली और छठ जैसे प्रमुख त्योहारों की होगी, इसलिए जिला प्रशासन ने नदी परिवहन को वैकल्पिक माध्यम के रूप में चुना है। यातायात सुचारू रखने के लिए बरारी पुलघाट से 7 बड़े यात्री जहाजों और मालवाहक जहाजों का परिचालन सुनिश्चित किया जाएगा।
यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इन जहाजों पर लाइफ जैकेट, स्थानीय गोताखोर, एनडीआरएफ और पर्याप्त पुलिस बल तैनात रहेंगे। इसके साथ ही अवैध और ओवरलोड बालू और गिट्टी लदे वाहनों पर कड़ी निगरानी के लिए विशेष प्रवर्तन टीमें घाटों पर तैनात की जाएंगी। वर्तमान दो लेन के विक्रमशिला सेतु पर लगने वाले भीषण महाजाम से स्थायी मुक्ति दिलाने के लिए इसके समानांतर बन रहे फोरलेन महासेतु परियोजना को भी गति दी जा रही है। हालांकि बाढ़ के कारण मुख्य नदी में इसका काम कुछ समय के लिए थमा था, लेकिन अब सहायक बुनियादी ढांचे पर काम तेज है। राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, भागलपुर ने नवगछिया जीरोमाइल से लेकर चौधरीडीह पेट्रोल पंप तक प्रस्तावित फोरलेन पहुंच पथ के चौड़ीकरण के लिए आधिकारिक कसरत तेज कर दी है। इसके लिए जगदीशपुर अंचल के अधिकारियों को सरकारी जमीन की मापी और सीमांकन करने का जिम्मा सौंपा गया है।
इस परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय को मंजूरी के लिए भेजी जा चुकी है। इस पहुंच पथ में रेलवे की लगभग 50 मीटर भूमि भी शामिल है, जिसे पूर्व में बिहार सरकार द्वारा अधिग्रहित किया गया था, उसका भी नए सिरे से भौतिक सत्यापन किया जा रहा है।
अधिकारियों का मानना है कि मुख्य पुल के साथ-साथ इस फोरलेन एप्रोच रोड का निर्माण समय पर पूरा होने से भागलपुर बायपास और पूरे क्षेत्र की कनेक्टिविटी वैश्विक स्तर की हो जाएगी।