नई दिल्ली : वॉट्सएप ने अपने यूजर्स की जानकारी को फेसबुक के साथ साझा करने का फैसला किया है। वॉट्सएप का ये पॉलिसी अपडेट पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बना हुआ है। अब ये मामला दिल्ली हाइकोर्ट तक पहुंच गया है। दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार से जवाब मांगा है।

दो वॉट्सएप यूजर्स ने दाखिल की थी याचिका
चीफ जस्टिस जी. रोहिणी और जस्टिस संगीता ढींगरा ने वॉट्सएप्प का इस्तेमाल करने वाले दो लोगों की तरफ से दाखिल की गई याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस भेजा है। इस याचिका में आरोप लगाया गया है कि वॉट्सएप की इस नई पॉलिसी में यूजर्स के अधिकारों के साथ खिलवाड़ करती है। कर्मण्य सिंह सरीन और श्रेया सेठी की इस याचिका पर हाईकोर्ट ने मामले की पड़ताल करने की इच्छा जताते हुए संबंधित विभागों से 14 सितंबर तक जवाब देने को कहा है।

25 सितंबर से हट जाएगा डाटा प्रोटेक्शन वाला फीचर
इस याचिका में कहा गया है कि 7 जुलाई 2012 से लेकर तक वॉट्सएप की प्राइवेसी पॉलिसी चल रही थी उसे 25 अगस्त को बदल दिया गया। वॉट्सएप की ये नई पॉलिसी यूजर्स के अधिकारों के साथ समझौता करती है। साथ ही इस नई पॉलिसी से यूजर्स की प्राइवेसी भी खतरे में पड़ सकती है। 25 सितंबर से लागू होने वाली इस पॉलिसी के बाद यूजर्स भारी के डाटा प्रोटेक्शन वाला फीचर हटा दिया जाएगा। इसके बाद वॉट्सएप की सभी जानकारियों को फेसबुक अपने ग्रुप की सारी कंपनियों के साथ शेयर कर सकेगा। ये जानकारी मार्केटिंग और विज्ञापन के लिए भी इस्तेमाल की जा सकती है।

जबरदस्ती वॉट्सएप यूजर्स की ले रहा है सहमति
इस मामले में याचिका दाखिल करने वालों के वकील संदीप सेठी और प्रतिभा एम.सिंह ने हाइकोर्ट को बताया कि वॉट्सएप और फेसबुक अपनी पॉलिसी में बहुत बड़ा बदलाव करने जा रहे हैं। वकीलों ने कहा है कि जिस तरीके से इस पॉलिसी के लिए यूजर्स की सहमति ली जा रही है वो सही नहीं है। वॉट्सएप अपने यूजर्स की सहमति लेने का सिर्फ दिखावा कर रहा है।

वॉट्सएप का इस्तेमाल करने वाले लोगों के पास एक मैसेज आया था। इसमें बताया गया है कि पॉलिसी में बदलाव लाया गया है। लोगों को इस नई पॉलिसी को स्वीकार करने के लिए ऑप्शन दिया गया था। अगर कोई भी ये जानना चाहता है कि बदलाव क्या है तो इसके लिए अपडेटेड पॉलिसी का एक लिंक भी दिया गया था।