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नवों देवी मन्दिर में बिराजमान है स्वयंभू शिला के रुप में, मां आदिशक्ति

 

बलरामपुर, 12 अक्टूबर (हि.स.)। जनपद के तुलसीपुर रेलवे स्टेशन से तीन किलोमीटर उत्तर पश्चिम दिशा परसपुर ग्राम में नवों देवियों के साथ स्वयंभू प्रतिमा के रुप में मां आदि शक्ति बिराजमान है। नवरात्रि में दूर दराज से श्रद्धालु मां की दर्शन पूजन कर परिवार के सुख समृद्धि की कामना करते हैं। नवरात्रि के तृतीय दिन मां चन्द्रघन्टा के पूजन के लिए शुक्रवार को सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है।
इस मन्दिर का निर्माण नेपाल नरेश तथा सम्राट बिक्रमादित्य ने अपने समय में बनवाया था। प्रशासन की लापरवाही के कारण वर्तमान में मन्दिर जीर्णशीर्ण अवस्था में है।
मन्दिर निर्माण के पीछे मान्यता है कि हजारों वर्ष पूर्व इस स्थान पर मजलिस नाथ नाम के साधु आश्रम बना कर रहते थे। एक रात उन्हे स्वप्न आया कि यहां कुआं बनवाओं सुबह होते ही स्वप्न की बात भूल कर अपने नित्य कार्य में लग गये। दूसरी रात्रि पुनः स्वप्न में वही बात आने पर सुबह अपने सहयोगियों के साथ चर्चा कर गांव वालों की सहयोग से कुआं की खुदाई शुरु करा दिया। जैसे ही कुआं कुछ गहरा हुआ वहा से रक्त की धार बहने लगी। सभी लोग हत्प्रभ होकर खुदाई स्थल की अच्छी तरह से मिट्टी निकालने पर काले पत्थर में नवों देवियों की प्रतिमा मिली। प्रतिमा खंडित थी। प्रतिमा से खून बह रहा था। मौजूद ग्रामीणों ने आस-पास के विद्वानों से राय मशवरा कर वही पर प्रतिमा स्थापित कर मन्दिर बना दिया गया। आज वर्तमान में भी गहरे स्थान पर स्वयंभू प्रतिमा स्थापित है। निकली शिला (देवी प्रतिमा के कान के भाग) से हल्का जल का रिसाव होता रहता है।
मन्दिर के महन्थ गोपाल नाथ योगी बताते है कि मई व जून माह में जल का रिसाव बढ़ जाता है। महन्थ का दावा है कि जिस वर्ष जल का रिसाव ज्यादा होता है उस वर्ष बरसात खूब होती है। अलग अलग समय पर मन्दिर का जीर्णोद्धार तत्कालीन राजाओं के द्वारा हुआ है। मन्दिर के मुख्य प्रवेश द्वार पर निर्माण वर्ष 1244 अंकित है। नवरात्रि में दूरदराज से श्रद्धालु यहां पहुंच मां आदिशक्ति के नवोरुप का दर्शन पूजन करते हैं। 

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