चित्रकूट, 31 अगस्त (हि.स.)। धार्मिक स्थल चित्रकूट में गुरुवार को उस समय चमत्कार देखा गया जब कामदगिरि मंदिर के पुजारी ने कपाट खोला। पुजारी के अनुसार जब कपाट खुले तो कामदगिरि के मुखारविंद से दूध की धार बह रही थी। जैसे ही इस चमत्कार की जानकारी श्रद्धालुओं को हुई तो वहां पर देखने के लिए तांता लग गया। पौराणिक एवं ऐतिहासिक तीर्थ स्थल चित्रकूट तमाम विचित्र घटनाओं से जाना जाता है। इसी क्रम में गुरुवार को कामदगिरि के मुखारविंद से दूध की धारा बहती देखी गई। पुजारी भरत शरण रामायणी ने बताया कि जब प्रातः मंगला आरती के लिए भगवान कामतानाथ जी के पट खोले तो उनके मुख से दूध की धारा बह रही थी जिसके बाद तत्काल मुख के नीचे बर्तन रखा। उनका जैसे श्रंगार होता है, श्रृंगार करके आरती की गई। भगवान कामदगिरि के मुखरविंद से दूध की धारा की खबर जैसे ही श्रद्धालुओं को लगी तो वहां पर उनका तांता लग गया और दर्शन करने लगे। सभी लोगों को यह विश्वास हो गया कि इस वर्ष क्षेत्र खुशहाली से रहेगा।

प्रभु श्रीराम ने किया था साढ़े ग्यारह वर्ष पूजन
रामायणी ने बताया कि प्रभु श्रीराम ने कामतानाथ जी के साढ़े ग्यारह वर्ष दर्शन एवं पूजा की थी। कामदगिरि अनादि है और उनके मुख में दांत की जगह शालिग्राम विराजते हैं। जिनमें दो बाहर निकलते हैं। पांच उन्ही के मुंह में दांत की जगह जड़े हुए हैं जो प्राकृतिक है उन्ही शालिग्राम को स्नान कराने से पूर्व कभी दूध कभी जल की धारा प्रतिवर्ष निकलती है। विगत 46 वर्षों से उनके मुख से दूध की धारा नहीं निकली थी जो इस वर्ष प्रकट हुई है। रामायणी के मुताबिक इससे पूर्व मुख्य पुजारी श्रीकांत जी के समय 46 वर्ष पूर्व दूध की धारा बही थी। तुलसीकृत रामचरितमानस और बाल्मीकि रामायण में कामदगिरि मुखारविंदु के कई उल्लेख और वर्णन है। कहा कि प्रभु श्रीराम जब चित्रकूट वनवास काल में आए तो मत्तगयेन्द्र भगवान की अनुमति से कामदगिरि के पास ही उन्होंने अपना कुटी बनाई और प्रतिदिन कामदगिरि की पूजा अर्चना करते थे। श्रीराम के जाने के बाद से कामदगिरि में प्रति माह की अमावस्या को एक विशाल मेला लगता है, जिसमें पांच लाख से 10 लाख श्रद्धालु आते हैं। जब अमावस्या सोमवती हो जाती है और दीपावली में यह संख्या बढ़कर 25 से 30 लाख तक पहुंच जाती है।