सिडनी/ नई दिल्ली : इंडियन नेवी की स्कॉर्पीन क्लास सबमरीन्स की सीक्रेट टेक्नोलॉजी से जुड़ा 22,400 पेज का डाटा लीक हो गया है। सिडनी के अखबार ‘द ऑस्ट्रेलियन’ की रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है। डिफेंस मिनिस्टर मनोहर पर्रिकर को आधी रात को इस खुलासे के बारे में पता चला।

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उहोंने नेवी चीफ को तुरंत जांच के ऑर्डर दिए। ये डॉक्युमेंट्स लीक होना भारत के लिए बड़ा झटका है। इसकी वजह यह है कि नेवी फ्रांस के कॉन्ट्रैक्टर DCNS की मदद से मुंबई के मझगांव पोर्ट पर 6 स्कॉर्पीन क्लास सबमरीन्स तैयार कर कर रही है। इस पर 23400 करोड़ (3.5 बिलियन डॉलर) खर्च हो रहे हैं। एक सबमरीन कलवरी का मई में ट्रायल हो चुका है। नेवी का दावा- भारत से लीक नहीं हुआ डाटा…

स्कॉर्पीन सबमरीन्स टेक्नोलॉजी के लीक हुए 4457 पेज में अंडरवाटर सेंसर्स , 4209 पेज में वाटर सेंसर्स , 4301 पेज में कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम, 493 पेज में टॉरपीडो लॉन्च सिस्टम और स्पेसिफिकेशन, 6841 पेज में सब कम्युनिकेशन्स सिस्टम और 2138 पेज में नेविगेशन सिस्टम्स से जुड़ी जानकारी है।

इस खबर के सामने आने के बाद पर्रिकर ने मीडिया से कहा- “मुझे रात 12 बजे जानकारी मिली थी। सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि यह हमसे जुड़ा मामला है या नहीं? मुझे लगता है कि यह 100% लीक नहीं है। मैंने इस मामले में नेवी चीफ को जांच करने को कहा है।”
नेवी का कहना है कि ऐसा लग रहा है कि यह डाटा विदेश में लीक किया गया है, न कि भारत में। हालांकि, ऑस्ट्रेलिया मीडिया ने DCNS के हवाले से लिखा कि लीक फ्रांस से नहीं, बल्कि भारत से हुआ है।

उधर, फ्रांस के कॉन्ट्रैक्टर DCNS का कहना है कि इस खुलासे के बाद नेशनल सिक्युरिटी अथॉरिटी ने जांच शुरू कर दी है।
– बता दें कि भारत के अलावा मलेशिया, चिली और ऑस्ट्रेलिया के लिए भी नई जनरेशन की सबमरीन्स बनाने का कॉन्ट्रैक्ट DCNS के पास है।