नई दिल्ली: स्कॉर्पियन सबमरीन का संवेदनशील डाटा लीक होने से इंडियन नेवी को गहरा झटका लगा है। एक तरफ रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने पूरे मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं जबकि ऑस्ट्रेलियन मीडिया की रिपोर्ट्स के मुताबिक इस पूरी घटना के पीछे फ्रांसीसी नौसेना का एक पूर्व अधिकारी है।

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ख़बरों के मुताबिक ये अधिकारी DCNS के साथ एक सब-कॉन्ट्रेक्टर के तौर पर जुड़ा हुआ है। ये डाटा भी फ्रांस में ही साल 2011 में तैयार किया गया था। गौरतलब है कि फ्रांसीसी फर्म ने भी शुरुआत में भारत की तरफ से खुफिया जानकारी लीक होने की बात कही थी।

कंपनी का कहना था कि उसकी भूमिका सप्लाई तक है और तकनीकी डेटा तक उसकी पहुंच नहीं है। हालांकि DCNS की चिली को युद्ध-पोत बेचने और रूस को पानी और जमीन दोनों पर जहाज बेचने की योजना के संवेदनशील दस्तावेज भी लीक हुए हैं। जहाज के लीक हुए डाटा का भारतीय डील से कोई संबंध नहीं है। दूसरी ओर भारत के रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने बताया, ‘मैंने नौसेना प्रमुख से कहा है कि वह पूरे मामले का अध्ययन करें और पता लगाएं कि क्या लीक हुआ है? मुझे लगता है कि यह हैकिंग है।’

DCNS ने भी जताई चिंता
भारत के साथ मिलकर पनडुब्बी बनाने वाली फ्रेंच कंपनी डीसीएनएस ने इससे जुड़े दस्तावेज लीक होने की घटना पर चिंता जताई है। कंपनी ने कहा है, ‘ यह भारत के स्कॉर्पीन कार्यक्रम के लिए गंभीर चिंताजनक बात है।’ कंपनी ने कहा कि फ्रांस का सुरक्षा प्रशासन लीक हुए दस्तावेजों के मसले की जांच करेगा और यह पता लगाएगा कि आखिर ये किस प्रकार के थे। रिपोर्ट्स में कहा गया है कि लीक हुए दस्तावेजों में स्कॉर्पीन पनडुब्बी की खुफिया क्षमताओं, खुफिया क्षमताएं एकत्र करने की फ्रिक्वेंसी, अलग-अलग स्पीड पर पनडुब्बी की आवाज, गहराई, रेंज, मैग्नेटिक और इलेक्ट्रॉमैग्नेटिक डेटा आदि अन्य कई महत्वपूर्ण जानकारियां हैं।
नौसेना ने कहा कोई नुकसान नहीं
भारतीय नौसेना ने बुधवार को कहा कि स्कॉर्पियन पनडुब्बी के लीक दस्तावेजों से इसके राडार से बच निकलने और इसकी संचालन क्षमता पर कोई असर नहीं पड़ेगा। ऐसा इस वजह से क्योंकि यह विस्तृत ब्योरा पुराना है और इस पनडुब्बी का पता केवल खुले समुद्र में उतरने के बाद ही चलेगा। भारतीय नौसेना के सूत्र ने कहा कि स्कॉर्पियन पनडुब्बी से जुड़े लीक दस्तावेजों का ब्योरा मान्य नहीं है, क्योंकि जब यह समुद्र में उतरेगा तभी इसका सही पता चल पाएगा। उसने यह भी कहा कि दस्तावेज में इसका जो ब्योरा दिया गया है, वे परिकल्पित हैं। इसी वर्ग के पनडुब्बियों के गुण अलग-अलग हो सकते हैं। यह तापमान, खारापन, भौगोलिक स्थिति और अन्य पहलुओं पर निर्भर करता है।

बताया जाता है कि स्कॉर्पियन पनडुब्बियों की लीक हुई सूचना इसके प्रदर्शन एवं तकनीकी मैन्यूअल से जुड़ी है। इसमें ध्वनि संबंधी गुण, शोर का स्तर और पनडुब्बी की ध्वनि कितनी प्रसारित हुई, इसका विस्तृत ब्योरा है। नौसेना मुख्यालय के सूत्रों ने हालांकि कहा है कि वह साल 2011 का पुराना दस्तावेज है। नौसेना मुख्यालय में दस्तावेजों का विश्लेषण किया जा रहा है। नौसेना का कहना है कि ऐसा लगता है कि यह सब कहीं विदेश से हुआ है। पनडुब्बी की श्रेणी, उसके प्रकार और इसके निर्माताओं के बारे में जानकारी प्रतिद्वंद्वी नौसेना के पास हो सकती है लेकिन ऑपरेशन फ्रीक्वेंसी और इलेक्ट्रॉमैग्नेटिक से जड़ी जानकारी का लीक होना वाकई खतरनाक बात है। इन दस्तावेजों के लीक होने के बाद सारी दुनिया का ध्यान इस ओर आकर्षित हुआ चूंकि ब्राजील, मलयेशिया और चिली की नौसेनाएं भी स्कॉर्पीन पनडुब्बी के ही वेरिएंट इस्तेमाल करती हैं। इसके साथ ही DCNS ने हाल ही में ऑस्ट्रेलिया को पनडुब्बी सप्लाई करने का ठेका हासिल किया है।