नई दिल्ली: फरवरी 2018 तक सभी सिम कार्ड का आधार के साथ वेरिफाई होना जरूरी है। अगले साल फरवरी तक जो सिम कार्ड आधार के साथ वेरिफाई नहीं होंगे उन्हें डिऐक्टिवेट कर दिया जाएगा। इस साल फरवरी में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को आदेश दिया था कि वह एक साल के अंदर सौ करोड़ से ज्यादा वर्तमान और आगामी मोबाइल टेलिफोन उपभोक्ताओं की पहचान स्थापित करने की व्यवस्था करे। कोर्ट ने आदेश दिया था कि सत्यापन के लिए यूजर्स के सिम कार्ड को उनके आधार से लिंक कर दिया जाए।

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बता दें कि तत्कालीन सीजेआई जे. एस. खेहर और जस्टिस एन. वी रमन की पीठ ने केंद्र सरकार की तरफ से पेश हुए अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी के बयान के बाद यह आदेश दिया था। अटॉर्नी जनरल ने बयान में कहा था कि मोबाइल उपभोक्ताओं की पहचान सत्यापित करने की व्यवस्था की जाएगी और नए मोबाइल उपभोक्ताओं को आधार आधारित ई-केवाईसी फॉर्म भरने होंगे, ताकि सही पहचान सुनिश्चित हो सके।

कोर्ट ने कहा था, ‘यह दलील दी जाती है कि एक प्रभावी व्यवस्था बनाई जाएगी और जांच की प्रक्रिया एक साल में पूरी कर ली जाएगी…हम संतुष्ट हैं कि रिट याचिका में किए गए आग्रह पर समुचित ध्यान दिया जाएगा।’ पीठ ने उम्मीद जताई थी कि प्रक्रिया निकट भविष्य में पूरी हो जाएगी और अधिकतम एक साल पूरा होने से पहले इसे पूरा कर लिया जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के एक महीने बाद ही टेलिकॉम रेग्युलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) ने आधार कार्ड के बगैर सिम कार्ड देने पर रोक लगा दी थी। ट्राई की तरफ से जारी गाइडलाइन में कहा गया था कि मोबाइल सिम कार्ड, ब्रॉडबैंड और फिक्स लाइन फोन के लिए आधार कार्ड अनिवार्य होगा।

देश में डिजिटल ट्रांजेक्शन को बढ़ावा देने की बात पर पूर्व चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया खेहर ने कहा था कि मोबाइल सिम कार्ड रखने वालों की पहचान बेहद जरूरी है, ऐसा न होने पर यह धोखाधड़ी से रुपये निकालने के काम में इस्तेमाल हो सकता है। सरकार को जल्द ही पहचान करने की प्रक्रिया करनी चाहिए, वहीं केंद्र की ओर से कहा गया था कि इस मामले में उसे हलफनामा दाखिल करने के लिए वक्त चाहिए। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने दो हफ्ते का वक्त दिया था।