नई दिल्ली: एयर इंडिया के बाद अब सरकार चाहती है कि भारतीय रेलवे ऑनलाइन रिजर्वेशन में लगने वाला ट्रांजैक्शन चार्ज घटा दे। साथ ही, कैश का उपयोग घटाने और प्लास्टिक मनी को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने बैंकों से भी अपने चार्जेस घटाने का आग्रह किया है। काले धन पर प्रतिबंध लगाने के लिए मौजूदा सरकार नकदी के उपयोग में कमी लाना चाहती है। सरकार ने कई ऐसे कदम उठाए हैं, जिनका फायदा अगले कुछ सप्ताह में दिख सकता है।

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कार्ड और डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री ने हाल ही में एक टास्क फोर्स बनाई, जिसने सरकारी विभागों को ट्रांजैक्शन की लागत खुद वहन करने को कहा है। इस तरह की ट्रांजैक्शन लागत को आमतौर पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) कहा जाता है। सरकार की योजना के मुताबिक एयर इंडिया ने अपनी वेबसाइट पर कार्ड के जरिए बुक होने वाले टिकट के ट्रांजैक्शन चार्ज खुद भरने का फैसला लिया है।

टेलिकॉम कंपनी बीएसएनएल भी इसे फॉलो कर रही है।<br> <br> आने वाले महीनों में नैशनल हाइवेज अथॉरिटी ऑफ इंडिया टैग इस्तेमाल करने वाले लोगों को कुछ कैशबैक की सुविधा देगी, जिससे उन्हें टोल प्लाजा पर भीड़ से निजात मिलेगी और लोग आराम से ड्राइविंग कर सकेंगे।

हालांकि, भारतीय रेलवे इस योजना का विरोध कर रहा है, क्योंकि इंडियन रेलवे कैटरिंग ऐंड टूरिज्म कॉर्पोरेशन (IRCTC) कार्ड से होने वाले ट्रांजैक्शन से लगभग 600 करोड़ रुपए कमाता है। सूत्रों के मुताबिक वित्त मंत्रालय रेलवे से बातचीत कर रहा है और उसने रेल यात्रियों के लिए लागत घटाने का आग्रह किया है। खासकर तब जब रिजर्वेशन काउंटर पर बहुत भीड़ होती है और ऑनलाइन चैनलों ने ऑपरेशन की लागत कम कर दी है।

IRCTC पर रोजाना लगभग 14 लाख टिकट बुक किए जाते हैं।<br> <br> यहां तक कि पेट्रोल पंप्स ने भी क्रेडिट और डेबिट कार्ड के कुछ ट्रांजैक्शन्स को एमडीआर के लिए पास कर दिया है। सरकार इस पर नजर बनाए हुए है।

सूत्रों के मुताबिक सरकार ने बैंकों से हर महीने कम से कम थोड़े से फंड ट्रांसफर को भुगतान-मुक्त रखने का आग्रह किया है। सरकार का कहना है कि एटीएम मशीनों से हर महीने कम से कम तीन फ्री विद्ड्रॉल और NEFT से फंड ट्रांसफर करते समय तीन ट्रांजैक्शंस फ्री रखे जाने चाहिए।