नई दिल्ली: सुलगती कश्मीर घाटी को शांत करने के लिए गृह मंत्री राजनाथ सिंह श्रीनगर पहुंच गए हैं. श्रीनगर पहुंचने से पहले राजनाथ सिंह ने ट्वीट करके कश्मीरियत, इंसानियत और जम्हूरियत में यकीन रखने वालों से बातचीत की खुली दावत दी.

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राजनाथ ने ट्वीट किया, “दो दिन के दौरे पर श्रीनगर जा रहा हूं. वहां सिविल सोसाइटी से जुड़े अलग-अलग समूहों, राजनीतिक दलों और दूसरे जुड़े समूहों से बातचीत करूंगा.” उन्होंने आगे लिखा, “मैं नेहरू गेस्ट हाउस में रहूंगा. वो लोग जो कश्मीरियत, इंसानियत और जम्हूरियत में भरोसा रखते हैं उनका स्वागत है.”

राजनाथ सिंह ने अपने इस ट्वीट से साफ संकेत दिए हैं कि जो लोग भारत के संविधान में यकीन रखते हैं, उनके लिए बातचीत की खुली दावत है. घाटी में पिछले 47 दिन से कर्फ्यू जारी है.

दूसरी ओर, सरकार की नींद इस बात से उड़ी हुई है कि अलगाववादी नौजवानों को पैसे देकर पत्थर फेंकवा रहे हैं. यात्रा के दौरान गृहमंत्री वहां की स्थिति का जायजा लेंगे. गृह मंत्री के साथ गृह सचिव सहित बड़े अफसरों का दल भी जाएगा.

इन दो दिनों में गृहमंत्री घाटी में शांति बहाली के लिए उन सभी पक्षो से बातचीत करेंगे जो हालात के कारण न सिर्फ परेशान है बल्कि इस समस्या का हल भी चाहते है. लेकिन क्या अलगाव वादियों से बात होगी इसका जवाब में गृहमंत्रालय के अधिकारी का कहना है की इस बारे में साकार की नीति साफ़ है कि जो भी भारत के संविधान में भरोसा रखेगा साकार उससे बात के लिए तैयार है.

कश्मीर घाटी के पत्थरमारों को सत्याग्रही न मानकर अरुण जेटली ने दहशत के खिलाफ सरकार का सख्त रुख तो दिखाया लेकिन बयान से सरकार को लेने के देने पड़ गए. जम्मू कश्मीर की सीएम महबूबा मुफ्ती ही नाराज हो गईं. राजनाथ सिंह का जम्मू कश्मीर दौरा तय नहीं था लेकिन जेटली के बयान के बाद पीएम मोदी को सुलगती कश्मीर घाटी में मरहम की खेप लेकर राजनाथ सिंह को भेजने का फैसला करना पड़ा.

सूत्रों के मुताबिक सरकार को पता चला है कि जेटली जिनको सत्याग्रही मानने को तैयार नहीं हैं वो अलगाववादियों के हाथों पेड हैं. अलगाववादी पत्थर चलाने के बदले नौजवानों को 300 से 700 रुपये दे रहे हैं.

सरकार मान रही है कि बातों से पेड पत्थरबाजों को मनाना आसान नहीं होगा. मुद्दा ये है कि नौजवानों के हाथों में काम नहीं है इसलिए अलगाववादी पैसे के जोर पर उनसे पत्थर फेंकवा रहे हैं. इस दौरान राजनाथ सिंह कश्मीरी यूथ के लिए नौकरियाँ देने का भी एलान कर सकते हैं.

सुरक्षा बलों के साथ एनकाउंटर में हिज्बुल मुजाहिदीन के आतंकवादी बुरहान वानी की 8 जुलाई को हुई मौत की बाद फ़ैली अशांति के दौरान गृहमंत्री राजनाथ सिंह दूसरी बार कश्मीर जा रहे हैं. जम्मू-कश्मीर में हिंसा की घटनाओं में दो पुलिसकर्मियों सहित 65 लोगों की मौत हो चुकी है और कई हजार लोग घायल हुए हैं.