कैथल, 13 फरवरी (हि.स.)। अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के अध्यक्ष यशपाल मलिक ने कहा है कि हरियाणा में मुख्यमंत्री बनने की महत्वकांक्षा रखने लोगों ने हरियाणा में आगजनी करवाई। इस आगजनी में उन्होंने मनीष ग्रोवर, ओमप्रकाश धनखड़ व राजकुमार सैनी ने साजिश के तहत ऐसा किया, लेकिन समाज के एक होने के बाद अब उनकी ये साजिश फेल हो चुकी हैं। उन्होंने कहा कि जिसको राजनीति बीमारी है उनका कोई इलाज नहीं। इस आगजनी व हम पर हमला करवाने में हमारी जाति के लोग शामिल थे।

मलिक मंगलवार आरकेएम पैलेस में आयोजित जाट आरक्षण संघर्ष समिति की बैठक से पूर्व पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सरकार के साथ चार मांगों पर सहमति हुई है। समझौते के बाद ही भाईचारा न्याय यात्रा स्थगित की गई है। ऐसे में सरकार के साथ हुए समझौते की रखवाली करनी जरूरी हो गई है ताकि समझौता लागू हो सके। आरक्षण संघर्ष समिति ने भले ही अपना 15 तारीख का आंदोलन स्थगित कर दिया हो लेकिन 18 फरवरी को तय समय और स्थान के मुताबिक बलिदान दिवस कार्यक्रम जारी रहेंगे। यशपाल मलिक ने कहा कि जो खाप पंचायती समझौते का विरोध कर रही हैं। उनकी साजिशों का पर्दाफाश हो चुका है। जाट आंदोलन का विरोध करने पर कई खाप पंचायतों के प्रधानों को बदल दिया गया है।

यशपाल ने कहा कि सरकार के मोटिवेशन से ही सैनी जैसे लोग गंदी भाषा का प्रयोग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि राजकुमार सैनी जिस थाली में खा रहे हैं उसी में छेद कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अभी आने वाले चुनावी सीजन में सैनी की गलतफहमी दूर हो जाएगी। सरकार से जो समझौता हुआ है उसके प्रति सरकार गंभीर है। आरक्षण भी मिलेगा और अन्य मांगें भी लागू होगी। उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक का जाट एक है। उन्हीं के हकों की संघर्ष समिति लड़ाई लड़ रही है। एक सवाल के जवाब में मलिक ने कहा कि जो लोग कहते हैं कि मैं बाहर का हूं ये उन लोगों का षड्यंत्र है कि देश को जाति के नाम पर बांटते हैं।

उन्होंने कहा कि इनेलो जिन मुद्दों पर रैली का विरोध कर रही है उनकी मांगें जायज है। उनका एसवाईएल का मुद्दा है व अन्य मुद्दे हैं। चौधरी बीरेंद्र सिंह के इस समझौते पर दिए गए बयान कि मैं तो ब्याह में पंडितों की भूमिका में था। यशपाल मलिक ने कहा कि चौधरी वीरेंद्र सिंह ने इस मामले में मध्यस्थ की भूमिका निभाई है और वह पूरे समझौते के गवाह हैं। यशपाल मलिक ने कहा कि जाट, कापूज, मराठे, पटेल जातियों को लेकर आरक्षण के लिए देश के स्तर पर एक कमेटी बनेगी। जो अपनी मांगों के लिए आंदोलन की रूपरेखा तय करेगी। लेकिन उन्हें आशा है कि सरकार अगले सत्र में जाटों को आरक्षण देने के लिए विधेयक लाएगी और इस पूरे मामले की अदालत में भी गंभीरता से पैरवी करेगी। इस मौके पर उनके साथ संघर्ष समिति के जिला प्रधान प्रवीण किच्छाना, बलवान कोटड़ा सहित अन्य जाट नेता भी उपस्थित थे।