नई दिल्ली : विशेषज्ञ भले ही प्रोडुनोवा को ‘वॉल्ट ऑफ डेथ’ मानते हों लेकिन दीपा कर्माकर ऐसा नहीं मानतीं और उनका कहना है कि वह इस जानलेवा वॉल्ट से जुड़े खतरों के बावजूद इसे करती रहेंगी। ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करने वाली पहली भारतीय जिम्नास्ट दीपा उम्मीदों से बेहतर प्रदर्शन करते हुए रियो ओलंपिक के वॉल्ट फाइनल में पहुंची और पदक से मामूली अंतर से चूकते हुए चौथे स्थान पर रहीं।

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दुनिया के सर्वश्रेष्ठ जिम्नास्ट ‘वॉल्ट ऑफ डेथ’ के नाम से मशहूर प्रोडुनोवा वॉल्ट करने से बचते हैं लेकिन दीपा इसका अपवाद हैं। उन्होंने रियो से यहां लौटने पर हुए अपने शानदार स्वागत के बाद कहा, ‘मैं प्रोडुनोवा करती रहूंगी, मैं इस समय किसी दूसरे वाल्ट के बारे में नहीं सोच रही। मुझे नहीं लगता कि यह एक जानलेवा वॉल्ट है, अगर हम अभ्यास करें तो सबकुछ आसान हो जाता है, मेरे कोच ने मुझसे खूब अभ्यास कराया।’

त्रिपुरा की खिलाड़ी के कोच बिश्वेश्वर नंदी ने कहा, ‘सब में जोखिम है, अगर आप सही से अभ्यास करें तो वह आसान बन जाता है। मैंने दीपा को इस वॉल्ट का खूब अभ्यास कराया और इस तरह प्रोडुनोवा उसके लिए आसान बन गया।’ जिम्नास्ट खिलाड़ी ने फाइनल के अपने अनुभव को याद करते हुए कहा कि प्रोडुनोवा के कारण दर्शकों ने उनके लिए खूब तालियां बजायीं।

उन्होंने कहा, ‘मैं अपने वॉल्ट के लिए ओलंपिक में मशहूर हो गयीं, कुछ ने मुझे ‘प्रोडुनोवा गर्ल’ कहा तो दूसरों ने ‘दीपा प्रोडुनोवा’, फाइनल में बहुत सारे लोग मेरे लिए तालियां बजा रहे थे। मुझे लगा कि मैंने यह वॉल्ट चुनकर सही फैसला किया।’ दीपा ने कहा कि उनकी जिंदगी में कुछ नहीं बदला और वह बहुत गौरवान्वित हैं कि उन्होंने देश में जिम्नास्टिक को चर्चाओं में ला दिया। उन्होंने कहा, ‘मेरी जिंदगी अब भी वैसी ही है, मैं अब भी एक जिम्नास्ट हूं, मैं अब भी पदक जीतना चाहती हूं। लेकिन हां, मुझे अच्छा लगता है कि मेरी वजह से भारत में लोग जिम्नास्टिक को जानने लगे।’

खेल रत्न के लिए अपने नाम की सिफारिश किए जाने से खुश 23 साल की जिम्नास्ट ने कहा कि उन्हें अपने कोच को द्रोणाचार्य पुरस्कार दिए जाने पर अधिक खुशी होगी। उन्होंने कहा, ‘मेरे कोच मुझसे (खेल रत्न मिलने पर) ज्यादा द्रोणाचार्य पुरस्कार के हकदार हैं।’ द्रोणाचार्य पुरस्कार के लिए नामांकित कोच नंदी ने अपनी शिष्या की खूब तारीफ की और साथ ही कहा कि उन्हें हमेशा से पता था कि दीपा फाइनल के लिए क्वालीफाई करेंगी। उन्होंने कहा, ‘मैं दीपा के प्रदर्शन से संतुष्ट हूं, अगर हम पदक जीत जाते तो मुझे और अच्छा लगता लेकिन मैं खुश हूं।’