भोपाल/इंदौर, 19 अगस्त (हि.स.)। गणेशजी इस बार घरों में 10 के बजाय 11 दिन तक विराजेंगे। 5 सितंबर को विसर्जन सुबह होगा और दोपहर के बाद से श्राद्ध पक्ष की शुरुआत हो जाएगी। तिथियों में घटबढ़ के चलते दशमी तिथि दो दिन तक रहेगी। वहीं अनंत चतुदर्शी पांच सितम्बर को दोपहर 12 बजकर 41 मिनट तक रहेगी, उसके बाद पूर्र्णिमा तिथि लग जाएगी। तिथियों की घट-बढ़ के चलते इस बार अजीब सी स्थिति बनने जा रही है। श्राद्ध पक्ष इस बार पांच सितम्बर को दोपहर से आरंभ होगा। सुबह गणेशजी का विसर्जन किया जाएगा। गणेशोत्सव भी इस बार 10 के बजाय 11 दिन का होगा तथा 12वें दिन अनंतचतुर्दशी पर विसर्जन किया जाएगा। प्रथम पूज्य भगवान गणेश की स्थापना 25 अगस्त को रवि योग में की जाएगी। पंचांग के अनुसार चतुर्थी तिथि 24 की रात आठ बजकर 27 मिनट से लगेगी और 25 अगस्त को रात आठ बजकर 31 मिनट तक रहेगी। 25 को सूूर्योदय से लेकर दोपहर दो बजकर 36 मिनट तक मंगलकारी रवि योग रहेगा।

तिथियों की घटबढ़ के चलते पर्व आगे पीछे हो रहे हैं। पंचांगों के अनुसार दशमी तिथि 31 अगस्त व एक सितम्बर दोनों दिन रहेगी। पांच सितम्बर को अनंत चतुर्दशी दोपहर 12 बजकर 41 मिनट तक रहेगी। दोपहर 12 बजकर 42 मिनट से पूर्णिमा तिथि की शुरुआत होगी। इसी दिन से सोलह श्राद्ध की शुरुआत भी होगी। दोपहर बाद से आरंभ होने वाली तिथि को लेकर संशय बना हुआ है कि पूर्णिमा का श्राद्ध पांच सितम्बर को किया जाए अथवा अगले दिन।
सूर्योदय के साथ आरंभ होने वाली तिथि मान्य होने से लोग अगले दिन से श्राद्ध की शुरुआत का मन बना रहे हैं, किंतु अगले दिन प्रतिपदा तिथि लग जाने से पूर्णिमा का श्राद्ध उसी दिन करना होगा। तिथि का क्षय नहीं होने से सभी श्राद्ध लगातार होंगे। अनंत चुतर्दशी भले ही पांच सितंबर को आ रही हो, किंतु लोग चार को ही मनाएंगे इस दिन ही जुलूस आदि भी निकाले जाएंगे। इसके पीछे उनाक मानना है कि गणेशजी को श्राद्ध में विदाई नहीं दी जा सकती। रात के समय निकलने वाली झांकियों को लेकर भी असमंजस की स्थिति बन रही है।