जमशेदपुर: टाटा स्टील के जमशेदपुर प्लांट में एक कैलेंडर वर्ष में दूसरी बार अर्ली सेपरेशन स्कीम (ईएसएस) 20 अगस्त से प्रभावी हो रही है। एक माह तक चलने वाली इस स्कीम को पूर्व की तरह ही ‘सुनहरे भविष्य की योजना’ का नाम दिया गया है।
टाटा स्टील में प्रति कर्मचारी उत्पादकता को बढ़ाने के लिए 15 फरवरी 2015 के बाद एक बार फिर इसे प्रभावी किया गया है। स्कीम का लाभ लेने वाले कर्मचारियों को पूर्व की तरह ही सभी फायदे मिलेंगे।

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विभागों में लगेंगे पोस्टर
स्कीम का लाभ वही कर्मचारी ले सकते हैं, जिनकी सेवा अवधि दस वर्ष से ज्यादा बची है। इस स्कीम के साथ ‘नौकरी छोड़ो-नौकरी पाओ’ स्कीम को भी जोड़ा गया है। शुक्रवार को कंपनी के वाइस प्रेसिडेंट (एचआरएम) सुरेश दत्त त्रिपाठी ने इस संबंध में सर्कुलर जारी करते हुए सभी विभागों के चीफ को इसकी जानकारी भेज दी है। अधिक से अधिक कर्मचारी इस स्कीम का लाभ लें, इसके लिए कंपनी प्रबंधन सभी विभागों में इसके पोस्टर भी लगा रहा है।

स्कीम की खासियत
-45 वर्ष से अधिक उम्र वाले कर्मचारियों को अंतिम बेसिक-डीए का 120 प्रतिशत मिलेगा।
-45 वर्ष से कम उम्र के कर्मचारियों को अंतिम बेसिक-डीए का सौ प्रतिशत मिलेगा।
-ईएसएस के छह माह के अंदर क्वार्टर छोड़ने पर प्रतिमाह तीन हजार रुपये एचआरए मिलेगा।
-स्कीम लेने के बाद कर्मचारी को मिलने वाली मासिक पेंशन में प्रतिवर्ष एक हजार रुपये की बढ़ोतरी होगी।
-55 वर्ष से छह माह पूर्व अपने आश्रित को नौकरी देने का मिलेगा विकल्प।

सर्विस पूल के लिए अलग स्कीम
टाटा स्टील में कई कर्मचारी सर्विस पूल में हैं। इनके लिए ईएसएस की अलग स्कीम तय की गई है। यहां कार्यरत कर्मचारियों को पहले 15 दिन में स्कीम का लाभ लेने पर अंतिम बेसिक-डीए का 100% और बाद में लेने पर 80% मिलेगा।

बेटे-बेटी को दे पाएंगे नौकरी
ईएसएस स्कीम के तहत 46 वर्ष के कर्मचारी 55 वर्ष की उम्र से छह माह पूर्व तक कंपनी से मासिक पेंशन लेंगे। इसके बाद वे अपने बेटा, बेटी या आश्रित को अपनी नौकरी दे सकते हैं, लेकिन इसके बाद उनकी स्कीम की राशि बदल जाएगी।