चंडीगढ़, 13 फरवरी (हि.स.)। केंद्र सरकार द्वारा अमृतसर स्थित दरबार साहिब में रोजाना आयोजित किए गए जाने वाले लंगर के राशन को जीएसटी से मुक्त नहीं किए जाने से सिख संगत में जहां तीखा रोष है वहीं राजनीतिक दलों ने इस मुद्दे पर भी एक-दूसरे को घेरना शुरू कर दिया है। इस उठापटक के बीच शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी जीएसटी लागू होने के बाद पिछले सात माह के दौरान करीब दो करोड़ रुपए की अदायगी कर चुकी है।

दरबार साहिब में हर समय लंगर का आयोजन किया जाता है। यहां लंगर के माध्यम से रोजाना औसतन एक लाख व्यक्ति खाना खाते हैं। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी द्वारा लंगर के लिए आटा, दाल, घी, हल्दी, मिर्च, मसाला, चीनी व गैस सिलेंडर आदि खरीदे जाते हैं।
एसजीपीसी के मुताबिक लंगर के लिए 1 जुलाई, 2017 से 31 जनवरी, 2018 तक 20 करोड़ 17 लाख 90 हजार रुपये की रकम रसद के लिए अदा की गई, जिसमें एक करोड़ 89 लाख 90 हजार रुपए जीएसटी कर के रुप में अदा किए गए हैं। देसी घी पर जो रकम अदा की गई उस 52 लाख 58 हजार 902 रुपए 12 प्रतिशत के हिसाब से जीएसटी लगा।

केंद्र सरकार द्वारा जीएसटी लागू किए जाने के तुरंत बाद शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी, अकाली दल तथा अन्य राजनीतिक दलों ने केंद्र सरकार से लंगर के राशन को जीएसटी के दायरे से बाहर करने की मांग उठाई थी। केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली द्वारा इस दिशा में सकारात्मक प्रतिक्रिया दिए जाने के बावजूद मामला अधर में है। इसके चलते शिरोमणि कमेटी द्वारा अब तक करोड़ों रुपए जीएसटी के रूप में अदा किए जा चुके हैं। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रवक्ता दलजीत सिंह बेदी के मुताबिक गुरु घरों को जीएसटी से मुक्त करने के लिए पंजाब सरकार से अनुरोध किया गया था। अब एक बार फिर एसजीपीसी अध्यक्ष गोबिंद सिंह लौंगोवाल के नेतृत्व में एक शिष्टमंडल बहुत जल्द प्रधानमंत्री तथा वित्त मंत्री से मिलेगा।

दूसरी तरफ पंजाब के वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल ने कहा कि पंजाब सरकार इस मामले में सकारात्मक रुख अपनाए हुए है। केंद्र सरकार द्वारा इस मामले में स्वीकृति दिए जाने के बाद ही इसे लागू किया जा सकता है। केंद्र सरकार को चाहिए कि वह जल्द से जल्द दरबार साहिब के लंगर के राशन को जीएसटी के दायरे से बाहर करे।