नई दिल्ली, 07 फरवरी (हि.स.)। सुप्रीम कोर्ट ने गोवा सरकार द्वारा खनन कंपनियों को जारी लीज के नवीनीकरण को निरस्त कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि गोवा सरकार ने खनन कंपनियों के लीज का नवीनीकरण कर सुप्रीम कोर्ट के पहले के आदेश का उल्लंघन किया है। कोर्ट ने गोवा सरकार को निर्देश दिया है कि वो नए सिरे से निविदा जारी कर खनन कंपनियों को लीज का लाइसेंस जारी करे।

इस मसले पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा गठित विशेषज्ञों की समिति पर सवाल खड़े करते हुए पूछा था कि इस समिति में उद्योगों के प्रतिनिधि तो मौजूद हैं लेकिन सिविल सोसायटी का कोई प्रतिनिधि क्यों नहीं है। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट को बताया गया था कि बड़ी मात्रा में अयस्कों के परिवहन से गोवा के पर्यावरण को काफी नुकसान हो रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि खनन को रोका नहीं जा सकता है लेकिन खनन की कड़ी निगरानी की जरुरत है।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने कहा था कि अब तक बीस मिलियन टन खनन किया जा चुका है| माइनिंग एसोसिएशन अतिरिक्त सात मिलियन टन के खनन की इजाजत मांग रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि एक्सपर्ट कमेटी ने सुझाव दिया है कि 34 मिलियन टन खनन किया जा सकता है। इसलिए अभी खनन नहीं रोका जा सकता है। याचिकाकर्ता ने कहा था कि 20 मिलियन टन दस वर्षों में खनन करने की इजाजत है लेकिन ये इतना खनन छह वर्षों में ही किया जा चुका है जो खनन गतिविधियों के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन है। अब और खनन की अनुमति देना गोवा में गैरकानूनी होगा।