चंडीगढ़: पैसे लेकर टिकट बांटने के आरोप पर पंजाब में आप के संयोजक सुच्चा सिंह को पद से हटा दिया गया है. आरोप पर सुच्चा सिंह ने कहा कि मेरे खिलाफ साजिश की गई है. छोटेपुर पर एक स्टिंग ऑपरेशन में पैसे लेने फेर में फंस गए थे. पार्टी नेता भगवंत मान ने कहा जांच कमेटी बनाई जा रही है, जिसमें सुच्चा सिंह को भी पक्ष रखने का मौका मिलेगा.

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अकाली दल से शुरू किया राजनीतिक सफर
आम आदमी पार्टी के पंजाब संयोजक सुच्चा सिंह छोटेपुर के 50 सालों में राजनीतिक सफर बेदाग रहा है. उन्होंने अपनी शुरुआत अकाली दल के साथ की, कुछ वक्त के लिए कांग्रेस में भी रहे और आखिरी में आम आदमी पार्टी को चुना.

ससुर रहे हैं अकाली दल के अध्यक्ष
पंजाब के माझा इलाके में गुरुदासपुर जिले के छोटेपुर गांव में जन्मे छोटेपुर आर्ट्स से ग्रेजुएट हैं. 67 साल के छोटेपुर अपने कॉलेज के दिनों से राजनीति में सक्रिय हैं. एक धर्मिक सिख परिवार में जन्मे छोटेपुर शरू से ही अकाली दल के साथ जुड़े रहे. छोटेपुर सन्त हरचन्द सिंह लोंगोवाल और गुरचरण सिंह तोहरा जैसे अकाली नेताओं के सहयोगी रहे. उनके ससुर मोहन सिंह तूर अकाली दल के अध्यक्ष रहे हैं.

1980 से 1986 तक गुरुदासपुर अकाली दल के जिलाध्यक्ष
छोटेपुर ने अपनी शुरुआत छात्र राजनीति से की. वो गुरुदासपुर गवर्मेंट कॉलेज स्टूडेंट यूनियन के अध्यक्ष से लेकर अपने गांव के सरपंच तक रहे. जानकार बताते हैं कि 1974 के पंचायत चुनाव में वो अकाली दल से इकलौते ब्लॉक समिति के चेयरमैन चुने गए, जबकि समूचे पंजाब में कांग्रेस का कब्जा था. इसके बाद पहले शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटी के सदस्य चुने गए और बाद में 1980 से 1986 तक गुरुदासपुर के अकाली दल के जिलाध्यक्ष रहे.

ऑपरेशन ब्लैक-थंडर के विरोध में दिया मंत्रिमंडल से इस्तीफा
इसी बीच 1985 में धारीवाल सीट से उन्होंने विधानसभा चुनाव जीता और मार्च 1986 में सुरजीत सिंह बरनाला ने उन्हें अपनी कैबिनेट में राज्यमंत्री बनाया. छोटेपुर को स्वास्थ्य, पर्यटन के साथ कृषि विभाग का राज्यमंत्री बनाया गया. उस वक्त कैप्टेन अमरिंदर सिंह बरनाला सरकार में कृषि मंत्री थे, लेकिन 2 महीने के अंदर ही छोटेपुर ने मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया जब 29-30 अप्रैल की रात ऑपरेशन ब्लैक-थंडर चलाया गया था. उस वक्त इस्तीफा देने वाले छोटेपुर व अन्य नेताओं में कैप्टन अमरिंदर सिंह भी शामिल थे. बाद में छोटेपुर को जेल भी जाना पड़ा.

… और कैप्टन अमरिंदर के लिए ढाल बनकर खड़े हुए छोटेपुर
छोटेपुर ने आगे की राजनीती अकाली दल (मान) के साथ शुरू की. उन्होंने 1992 में लोकसभा और 97 में विधानसभा का चुनाव लड़ा, लेकिन दोनों बार हार मिली. लेकिन 2002 में छोटेपुर ने धारीवाल सीट से निर्दलीय चुनाव जीता. 2002 में कांग्रेस की सरकार बनी और कैप्टेन अमरिंदर सिंह मुख्यमंत्री बने. कुल दस निर्दलीय विधायक विधानसभा पहुंचे थे. छोटेपुर निर्दलीय विधायकों के नेता बने. जब कांग्रेस के अंदर से कैप्टेन के खिलाफ बगावत हुई तब छोटेपुर निर्दलीय विधायकों के साथ कैप्टन के सहयोग में खड़े हुए.

बाजवा का समर्थन कर बने कांग्रेसी, बाजवा के कारण ही छोड़ी पार्टी
2007 में छोटेपुर विधानसभा का चुनाव हार गए. 2009 लोकसभा चुनाव के वक्त गुरुदासपुर सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार प्रताप सिंह बाजवा का समर्थन करते हुए कांग्रेस में शामिल हो गए. लेकिन 2012 के विधानसभा चुनाव में काहनुवां सीट से कांग्रेस ने बाजवा की पत्नी को टिकट दे दिया. छोटेपुर ने एकबार फिर निर्दलीय किस्मत आजमाई, लेकिन हार गए.

2014 में थामा आप का दामन
2014 लोकसभा चुनाव में छोटेपुर ने आप का दामन थामा और गुरुदासपुर से लड़े लेकिन फिर हार गए. लेकिन केजरीवाल ने छोटेपुर को राज्य का संयोजक बना दिया और छोटेपुर 2017 की तैयारी में जुट गए. लेकिन राज्य की कमान केजरीवाल ने संजय सिंह और दुर्गेश पाठक को दे दी और नेता के तौर पर भगवंत मान का चेहरा आप ने आगे किया.

पहले हाशिये पर, अब टिकट बेचने का आरोप
छोटेपुर को लगभग हाशिये पर ही रखा गया यहाँ तक कि टिकट वितरण में भी छोटेपुर की नहीं सुनी गई. पहले दो लिस्ट में छोटेपुर का नाम गायब रहा और अब आप के ही नेता उन पर टिकट बेचने का आरोप लगा रहे हैं. छोटेपुर के खिलाफ एक कथित स्टिंग का दावा किया जा रहा है.

फिर बनेंगे अमरिंदर के साथी!
छोटेपुर ने कहा है कि वह खुद पार्टी नहीं छोड़ेंगे, लेकिन ऐसे संभावना है कि पार्टी उनकी जल्द ही छुट्टी कर सकती है. कयास इस बात के लग रहे हैं कि छोटेपुर अपने पुराने साथी कैप्टन अमरिंदर सिंह के साथ जाएंगे. अमरिंदर ने हमेशा छोटेपुर को अपना दोस्त बताया है.

आप को लगेगा झटका, माझा इलाके में खोजनी होगी छोटेपुर की काट
छोटेपुर के मुद्दे पर आम आदमी पार्टी इमानदारी कार्ड खेलने की कोशिश करेगी तो छोटेपुर धोखा मिलने की इमोशनल राजनीति करेंगे. फ़िलहाल इस घटनाक्रम से आम आदमी पार्टी के चुनाव अभियान को झटका तो लगा ही है. पंजाब के माझा इलाके की 24 सीटों पर आप को छोटेपुर की काट खोजनी होगी.