नई दिल्ली: पंजाब में आगामी विधानसभा चुनाव के लिए एक तरफ जहां सभी राजनीतिक दल गहरी रणनीति बनाने में जुटे हैं, वहीँ आप की आपसी लड़ाई खुलकर सामने आ गई है. चुनाव जीतने का दम भर रही आप के लिए ये आपसी घमासान भारी परेशानी खडी कर सकता है.

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आम आदमी पार्टी ने राज्य में पार्टी के संयोजक सुच्चा सिंह छोटेपुर को पद से हटा दिया है. एक स्टिंग ऑपरेशन में छोटेपुर कथित रूप से विधानसभा टिकट के बदले पैसे लेते नजर आ रहे हैं, हालांकि छोटेपुर कह रहे हैं की यह उनके खिलाफ साजिश है. उन्होंने जिस तल्ख अंदाज में पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल पर हमला किया और उन्हें ‘सिख विरोधी’ तक बता डाला, उससे यह साफ है कि आगामी चुनाव में वह पार्टी के लिए परेशानी का सबब बन सकते हैं.

अमरिंदर की कुर्सी पहले भी बचा चुके हैं छोटेपुर 
अकाली दल, कांग्रेस पार्टी से होते हुए आम आदमी पार्टी से जुड़ने वाले छोटेपुर का 50 वर्षों का लंबा राजनीतिक सफर बेदाग रहा है. विरोधी भी उनकी ईमानदारी के कायल हैं. पंजाब में कांग्रेस के प्रभारी और सीएम पद के उम्मीदवार कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कुछ दिन पहले ही उन्हें ‘बेदाग राजनीतिक करियर’ वाला नेता बताया था. 2002 के विधानसभा चुनाव् के बाद जब अमरिंदर के खिलाफ कांग्रेसियों ने बगावत कर दी थी तो छोटेपुर ने निर्दलीयों की मदद से उनकी कुर्सी बचने में मदद की थी. इसे देखते हुए अब ऐसी अटकलें हैं कि छोटेपुर आप से नाता तोड़ अपने पुरानी साथी अमरिंदर का साथ देने के लिए कांग्रेस का दामन थाम सकते हैं.

सुच्चा सिंह छोटेपुर को उनके स्वतंत्र विचारों के लिए जाना जाता रहा है. इसका अंदाजा इसी बात से मिलता है कि 1986 में जब अमृतसर में ‘ऑपरेशन ब्लैक थंडर’ चलाया, तब तत्कालीन मुख्यमंत्री सुरजीत सिंह बरनाला की सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे छोटेपुर ने इसके विरोध में पद से इस्तीफा दे दिया था.

कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, छोटेपुर के करीबी उन्हें ‘षड्यंत्र का शिकार’ बता रहे हैं’, वहीं कुछ विपक्षी नेता बताते हैं कि ‘उनकी केजरीवाल से ज़्यादा बन नहीं रही थी’. ऐसे में अब उनके खिलाफ पार्टी की इस कार्रवाई से इस बात की अटकलें तेज हो गई हैं कि वह पार्टी का दामन छोड़ अपने पुराने साथी अमरिंदर सिंह के साथ जा सकते हैं.

माझा इलाके मुश्किल होगा छोटेपुर का विकल्प ढूंढना
पंजाब के माझा से ताल्लुक रखने वाले छोटेपुर की इलाके के पार्टी नेताओं पर खासी पैठ है और समझा जा रहा है कि छोटेपुर ने अगर आप छोड़ा तो उनके साथ कई दूसरे नेता भी उनके साथ पार्टी का दामन छोड़ देंगे. ऐसे में केजरीवाल और उनकी पार्टी को माझा की 24 सीटों पर छोटेपुर की काट खोजनी टेढ़ी खीर होगी.