नई दिल्लीः केंद्रीय कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर हैं. न्यूनतम मजदूरी 246 रुपये से बढ़कर 350 रुपये हो गई है और ग्रुप सी के कर्मचारियों को 2 साल का बकाया बोनस मिलेगा. केंद्र सरकार के करीब 33 लाख कर्मचारियों के लिए सरकार ने मंगलवार को सालाना बोनस की घोषणा की, जो पिछले 2 सालों से बकाया था. इस बारे में केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली ने कहा, “केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए 2014-15 और 2015-16 का बोनस संशोधित मानदंडों के आधार पर जारी किया जाएगा. यह 2 सालों से बकाया था. इसके बाद बोनस को सातवें वेतन आयोग के तहत दिया जाएगा.

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केंद्र सरकार ने ये बोनस न्यूनतम मजदूरी सलाहकार बोर्ड की सिफारिशों को मानते हुए घोषित किया है. इसके तहत एक और बड़ा ऐलान किया गया है कि अकुशल गैर कृषि कामगारों के लिए न्यूनतम मजदूरी 350 रुपया प्रतिदिन तय कर दिया है. अभी ये 246 रुपया प्रतिदिन है यानी कुल 104 रुपये की बढ़त की गई है. खुद वित्त मंत्री ने इसका ऐलान करते हुए कहा कि सरकार बोनस संशोधन कानून को सख्ती से लागू करेगी और केन्द्रीय कर्मचारियों को संशोधित दर से साल 2014-15 और 2015-16 यानि दो साल के लिए बोनस देगी.

केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा है इस निर्णय पर जल्दी ही अधिसूचना यानी नोटिफिकेशन जारी किया जाएगा. वित्त मंत्री ने बताया कि इंटर मिनिस्टीरियल कमिटी की सिफारिशों के मुताबिक सरकार ने ये फैसला लिया है. वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा है सरकार बोनस संशोधन कानून को सख्ती से लागू करेगी और केन्द्रीय कर्मचारियों को संशोधित दर से पिछले 2 साल का बोनस देगी.

वहीं, सरकार ने ये भी घोषणा की है कि हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में लंबित बोनस भुगतान के मामलों को निपटाने के लिए भी कदम उठाए जाएंगे.

केंद्र सरकार ने ट्रेड यूनियंस की हड़ताल रोकने के लिए न्यूनतम मजदूरी सलाहकार बोर्ड-मिनिमम वेज एडवाइजरी बोर्ड की सिफारिशों को माना है. अरुण जेटली ने आज प्रेस कॉन्‍फ्रेंस में बताया कि अकुशल गैर कृषि कामगारों-नॉन एग्रीकल्‍चर वर्कर्स के लिए 350 रुपए रोजाना न्यूनतम वेतन तय किया गया है जो अभी 246 रुपए है. ध्यान रहे कि ट्रेड यूनियंस ने शुक्रवार को हड़ताल का एलान किया हुआ था. हालांकि इस एलान के बाद भी लेफ्ट ट्रेड यूनियन सीटू हड़ताल का फैसला बदला नहीं है. देश की करीब 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियंस ने 2 सितंबर 2016 को देशव्‍यापी हड़ताल बुलाई है जो लेबर रिफॉर्म और उनकी मांगें पूरी नहीं करने के विरोध में है.