-बचाव पक्ष के वकील की दलील, विधायकों को कोई भी वित्तीय फायदा नहीं दिया गया तब लाभ के पद के दायरे में कैसे
नई दिल्ली, 13 फरवरी (हि.स.)। दिल्ली के आम आदमी पार्टी के अयोग्य ठहराए गए विधायकों की याचिका पर सुनवाई के दौरान आप विधायकों की ओर से वरिष्ठ वकील केवी विश्वनाथन ने कहा कि आप विधायकों को कोई भी वित्तीय फायदा नहीं दिया गया था। न ही कोई अलग से ऑफिस दिया गया था। यह पद लाभ का पद नही हैं। उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग ने नोटिस देने के बाद उन्हें कभी सुनवाई का मौका नहीं दिया। मामले की अगली सुनवाई 15 फरवरी को होगी।

केवी विश्वनाथन ने यूवी रमन्ना के केस का उदाहरण दिया। उन्होंने दिव्य प्रकाश और जया बच्चन के केस का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि कंपेनसेटरी अलाउंस को लाभ के पद की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता है। उन्होंने कहा कि आप विधायकों ने कभी भी आर्थिक लाभ नहीं लिया।

पिछले 8 फरवरी को कोर्ट ने पूछा था कि अगर कार और दफ्तर जैसी सुविधाओं के लिए ये पद मिला था तो भले ही सुविधा का लाभ न लिया हो, लेकिन उस पद पर रहते हुए लाभ के पद के दायरे में कैसे नहीं आएंगे। कोर्ट ने कहा था कि मुख्यमंत्री द्वारा 21 संसदीय सचिवों को नियुक्त किया गया और उन्हें काम बांटे गए।

पिछले 7 फरवरी को दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मामले पर रोजाना सुनवाई करने का फैसला किया था। निर्वाचन आयोग ने हाईकोर्ट से कहा कि चूंकि राष्ट्रपति ने आयोग की सिफारिश पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने मुहर लगा दी है| इसलिए अब यह याचिका सुनवाई योग्य नहीं है। इसके जवाब में आप विधायकों ने कहा कि निर्वाचन आयोग निजी पक्षकार की तरह व्यवहार कर रहा है। निर्वाचन आयोग अर्ध न्यायिक प्राधिकार की तरह काम नहीं कर रहा है।

पिछले 30 जनवरी को हाईकोर्ट निर्वाचन आयोग को नोटिस जारी तक जवाब मांगा था। कोर्ट ने निर्वाचन आयोग को निर्देश दिया कि वे आप विधायकों को अयोग्य ठहराने के अपने फैसलों के बारे में विस्तृत हलफनामा पेश करें। डिवीजन बेंच ने सिंगल बेंच के उस आदेश को बरकरार रखा है जिसमें निर्वाचन आयोग को निर्देश दिया है कि वह मामले के निपटारे तक उप चुनावों की घोषणा न करे।